बीते कुछ वर्षों में कॉर्बेट और इससे सटे वन प्रभागों में बाघों का कुनबा काफ बढ़ गया है। कुनबा बढ़ने के साथ ही बाघ जंगलों के सीमावर्ती क्षेत्रों तक अपना इलाका बना रहे हैं और तेंदुए को जंगल से बाहर खदेड़ रहे हैं। ऐसे में आबादी क्षेत्रों में घटनाओं को अंजाम देने पर वन विभाग तेंदुओं को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर तो भेज रहा है, लेकिन वहां बाड़ों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से तेंदुओं को अपनी आजादी नहीं मिल पा रही हैं। रेस्क्यू सेंटर के तीन बाड़े ऐसे हैं, जिनमें प्रत्येक में मजबूरी में दो-दो तेंदुओं को रखा गया है।
बता दें कि कॉर्बेट के ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर में 10 बाघ और 10 तेंदुए के बाड़े बनाए गए हैं। बाघों के एक बाड़े को 500 वर्ग मीटर जबकि तेंदुए के बाड़े को 250 वर्ग मीटर आकार का बनाया गया है ताकि रेस्क्यू किए गए बाघ और तेंदुए आसानी से विचरण कर सकें। इधर आबादी क्षेत्रों में हुई घटना के बाद कई तेंदुओं को पकड़ा गया। वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि रेस्क्यू सेंटर में 13 तेंदुए हो गए हैं।
ऐसे में 10 में से तीन बाड़ों में दो-दो तेंदुओं को रखा गया है। इसके लिए एक तेंदुए को बाड़े में जबकि दूसरे को उसी बाड़े में बने कमरे में रखा जा रहा है। हालांकि वनकर्मी हर घंटे दोनों तेंदुओं की स्थितियों को बदलते रहते हैं ताकि दोनों तेंदुए बिना किसी परेशानी के बाड़े में विचरण कर सकें।
बाघों के बाड़े भी हुए फुल
कॉर्बेट कार्यालय के अनुसार पिछले महीने ओखलढूंगा से आए हमलावर बाघ के रेस्क्यू सेंटर में आने के बाद रेस्क्यू सेंटर के सभी बाड़े फुल हो गए हैं। कार्बेट प्रशासन ने रेस्क्यू सेंटर में बाघों के लिए भी 10 बाड़े बनाए हैं। अब यदि किसी हमलावर या घायल बाघ को रेस्क्यू सेंटर में लाया जाता है तो निश्चित तौर पर कार्बेट प्रशासन की चिंताएं बढ़ जाएंगी।
रेस्क्यू सेंटर में तेंदुए के 10 बाड़ों में 13 तेंदुए हैं। इनमें तीन बाड़ों में दो-दो तेंदुए रखे गए हैं। सभी को वन कर्मियों की मॉनिटरिंग में रखा गया है। पूरे प्रयास किए जा रहे हैं कि रेस्क्यू कर लाए गए वन्यजीवों को किसी तरह की परेशानी न हो। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व।