संसद द्वारा शत्रु संपत्ति संशोधन विधयक को मंजूरी दे दिए जाने के बाद सरोवर नगरी स्थित राजा महमूदाबाद की करोड़ों रुपये की शत्रु संपत्ति अब उनके वारिसान के पक्ष में हस्तांतरित नहीं हो सकेगी, लिहाजा उक्त संपत्ति पूरी तरह से सरकार के अधीन हो जाएगी, हालांकि उक्त शत्रु संपत्ति के रखरखाव का जिम्मा बतौर कस्टोडियन जिलाधिकारी के पास ही रहेगा।
जानकारी के मुताबिक आजादी से पूर्व अवध रियासत के सबसे बड़े जमींदार राजा महमूदाबाद वर्ष 1962 में पाकिस्तान चले गए थे। लिहाजा सरकार ने उनकी करोड़ों की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित कर अपने कब्जे में ले लिया था। उनके निधन के बाद उनके पुत्र अमीर मोहम्मद खान ने अपने पिता की संपत्ति को वापस लेने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद न्यायालय ने कुछ जगहों पर उन्हें उनके पिता की संपत्तियों का उत्तराधिकारी घोषित किया, लेकिन नैनीताल समेत कुछ स्थानों पर मौजूद शत्रु संपत्ति के मामले अलग-अलग न्यायालयों में केस चले।
वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश में स्थित शत्रु संपत्तियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जहां से वर्ष 2004 में न्यायालय ने वादी अमीर मोहम्मद खान के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन तब प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। वर्ष 2010 में सरकार ने शत्रु संपत्ति पर कब्जा बरकरार रखने के लिए एक अध्यादेश जारी किया तब केंद्र सरकार ने अध्यादेश को कानून में बदलने के लिए शत्रु संपत्ति विधेयक को संसद में पारित कराने के प्रयास किए, लेकिन तब कुछ पार्टियों के विरोध के चलते विधेयक पारित नहीं हो सका।
पिछले साल 10 मार्च को शत्रु संपत्ति संशोधन एवं मान्यकरण विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ था, जिसे मंगलवार को लोकसभा ने भी पारित कर दिया। इसके बाद अब शत्रु संपत्ति के सभी अधिकार कस्टोडियन के अधीन रहेंगे और शत्रु संपत्ति का हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा।
यही नहीं विधेयक के अनुसार शत्रु के उत्तराधिकारी अथवा कानूनी उत्तराधिकारी उस संपत्ति के हकदार नहीं होंगे। नैनीताल में 1870 में निर्मित मैट्रोपोल होटल, इसी परिसर में स्थित कई मकान व इससे लगी भूमि शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज है। मैट्रोपोल परिसर में जिला प्रशासन की ओर से पार्किंग की व्यवस्था की गई है। डीएम इसके कस्टोडियन हैं।
संसद द्वारा शत्रु संपत्ति संशोधन अधिनियम को मंजूरी दे देने के बाद मैट्रोपोल होटल और इससे लगी समस्त शत्रु संपत्ति पर अब केंद्र के अधीन रहेगी। केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में अभी कोई दिशा निर्देश जारी नहीं हुए हैं। जैसे ही दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे, उसी के अनुरूप शत्रु संपत्ति के रखरखाव अथवा उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- दीपक रावत, डीएम, नैनीताल