हल्द्वानी। पिछले साल जंगल की आग ने भारी तबाही मचाई थी। अब जंगल की आग के प्रभावी नियंत्रण की कोशिश केंद्र और राज्य दोनों स्तर से हो रही है। इसी क्रम में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर विश्व बैंक की टीम हल्द्वानी पहुंच रही है, इस टीम का उद्देश्य आग पर काबू पाने के लिए प्रभावी रणनीति को तैयार करना है।
2016 में जंगल की आग का मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी उठा था। आग पर काबू पाने के लिए एयर फोर्स तक की मदद लेनी पड़ी थी। ऐसे में वनाग्नि नियंत्रण के लिए एहतियातन कदम उठाने शुरू किए गए हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने विश्व बैंक को वनों की आग लगने के कारणों और उसकी रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति बनाने का निर्देश दिया है।
इसी के तहत विश्व बैंक की टीम रविवार को पहुंच रही है। इस टीम के साथ वन विभाग के उच्चाधिकारियों की कई चरणों में बैठक तय की गई है। इसमें वन विभाग घटनाओं, आग बुझाने के तरीकों आदि के बारे में जानकारी देगा। विश्व बैंक की टीम स्थलीय भ्रमण भी करेगी। इसके अलावा अन्य स्रोत से जानकारी भी जुटाएगी। विश्व बैंक के साथ होने वाली बैठक की तैयारी को लेकर वन विभाग जुटा था।
हल्द्वानी। जंगल की आग पर काबू पाने के लिए 1987 में बड़ी योजना बनाई गई थी। इस योजना को मार्डन फायर कंट्रोल प्रोजेक्ट नाम दिया गया था। केंद्र सरकार के सहयोग से पायलेट योजना के तहत यूपी और महाराष्ट्र का चयन किया गया था। इसका कार्यालय हल्द्वानी में बना था। केंद्र सरकार ने उस वक्त भी एयर फोर्स के हवाई जहाज से लेकर हैलीकाप्टर तक दिए थे। अफसरों को ट्रेनिंग के लिए अमेरिका तक भेजा गया था। इसके अलावा काफी संसाधन आदि भी जुटाए गए थे। ब्यूरो