अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो सरोवर नगरी नैनीताल के वाशिदों को मई माह के अंतिम सप्ताह से बिजली गुल होने के बाद भी नियमित रूप से पानी मिल सकेगा। जल संस्थान के सभी पंप हाउस अब जनरेटर से लैस होने जा रहे हैं। इन दिनों जनरेटरों को लगाने का कार्य चल रहा है। इसमें करीब 1.42 करोड़ का खर्च आ रहा है।
नैनीताल में अक्सर हिमपात, तेज आंधी और बिजली की लाइनों में पेड़ों के गिरने से बिजली गुल हो जाती है, जिसकी वजह से जल संस्थान के पंप भी नहीं चल पाते हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जब कई बार सीएम हरीश रावत नैनीताल प्रवास में रहे तो लोगों द्वारा जल संस्थान के पंप हाउसों में जनरेटर की व्यवस्था न होने के मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया। रावत ने इसको गंभीरता से लेते हुए एडीबी की मदद से जल संस्थान के सभी पंप हाउसों में जनरेटर लगाने की स्वीकृति दे दी।
एडीबी के मुख्य परियोजना प्रबंधक दुर्गेश पंत ने बताया कि मुख्य पंप हाउस में 380 किलोवाट, चिल्ड्रन पार्क में 625 किलोवाट, सूखाताल में 250 किलोवाट और फांसी गधेरा स्थित पंप हाउस में 160 किलोवाट क्षमता का जनरेटर लगाया जा रहा है। चारों जनरेटरों को पंप हाउसों में लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। पंत की मानें तो मई माह के अंत तक जल संस्थान को जनरेटर हैंड ओवर कर दिए जाएंगे।
लंबे समय से पंप हाउसों में जनरेटर की जरूरत महसूस की जा रही थी। पंप चलाने के लिए 420 वोल्ट की जरूरत होती है लेकिन गर्मी के दिनों में बिजली की खपत अधिक होने तथा उत्पादन कम होने से पंप चलाने को 380-400 वोल्ट ही बिजली मिल पाती है, जिससे हाईजोन के पंप नहीं चल पाते हैं और लोगों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो जाती है। जनरेटर लगने से बिजली गुल होने पर लोगों को नियमित रूप से पानी की सप्लाई हो सकेगी। 55 हजार की आबादी वाले शहर में जल संस्थान के पास 7500 उपभोक्ता हैं। पीक सीजन में शहर में 19 एमएलडी और आफ सीजन में 12 एमएलडी पानी की जरूरत होती है जो विभाग पूरी कर लेता है।
-जगदीप चौधरी, ईई, उत्तराखंड जल संस्थान नैनीताल।