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Jagdeep Dhankhar News: नैनीताल में बिगड़ा था उप राष्ट्रपति का स्वास्थ्य, एक महीने के भीतर इस्तीफा

Tue, 22 Jul 2025 11:39 AM IST
हीरा मेहरा गिरीश रंजन तिवारी

सार

नैनीताल आगमन पर धनखड़ ने 25 जून को कुमाऊं विश्वाविद्यालय के स्वर्ण जयंती संबंधी समारोह में भाग लिया था।  विवि के कार्यक्रम की समाप्ति पर उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया था। वहीं, सोमवार को खराब सेहत का हवाला देकर उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। 
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उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करीब एक महीने नैनीताल आगमन के दौरान उप राष्ट्रपति का स्वास्थ्य बिगड़ा था...और सोमवार को खराब सेहत का हवाला देकर उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के आकस्मिक इस्तीफे से कुमाऊं विवि में मायूसी है।

नैनीताल आगमन पर धनखड़ ने 25 जून को कुमाऊं विश्वाविद्यालय के स्वर्ण जयंती संबंधी समारोह में भाग लिया था। विवि के कार्यक्रम की समाप्ति पर उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया था और वह अपने पुराने साथी रहे पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र सिंह पाल के गले में हाथ डाले हुए झूल गए थे जिससे मौके पर हड़कंप मैच गया। वहां मौजूद उनके सुरक्षा कर्मियों और चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उन्हें संभाला और राज्यपाल गुरमीत सिंह उन्हें साथ में राजभवन को ले गए। उनका स्वास्थ्य तुरंत ही सुधर गया और उन्होंने अगले दिन शेरवुड स्कूल सहित विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया।

26 जुलाई तक निबंध विवि में जमा किया जाना था

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कुमाऊं विवि के कार्यक्रम दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से कहा था कि 50 साल पहले इसी दिन देश में लोकतंत्र का गला घोंटकर आपातकाल थोपा गया था। इस त्रासदी को याद कर विद्यार्थी एक निबंध लिखकर विवि के माध्यम से उन्हें भिजवाएं। पहले प्राप्त होने वाले 100 निबंध लिखने वाले विद्यार्थियों को वह पचास-पचास के दो समूहों में अपने आवास पर लंच देंगे और संसद भवन दिखाएंगे। विद्यार्थी इस निबंध की तैयारी में बहुत उत्साह से जुटे थे। विवि ने इसके लिए क्यूआर कोड जनरेट किया था और 26 जुलाई तक निबंध विवि में जमा किया जाना था। अब उनके इस्तीफे से विद्यार्थी मायूस हैं।

अपने संबोधन से जीता था सबका दिल
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कुमाऊं विश्वाविद्यालय में अपने संबोधन में बहुत ही रोचक शैली में अपनी बात रखी और श्रोताओं को बहुत प्रभावित किया था। उन्होंने मजेदार उदाहरण देकर लोगों को बहुत गुदगुदाया और गंभीर व महत्वपूर्ण सलाह देकर विद्यार्थियों को प्रेरित भी किया। अपनी वाकपटुता से उन्होंने सभी का दिल जीत लिया था। उन्होंने युवाओं को देश के विकास में कैटेलिस्ट की भूमिका निभाने और स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 के लिए अपना लक्ष्य भी निर्धारित करने का मूलमंत्र दिया था।

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