नगर निगम की आवंटित दुकानों का मौजूदा किराया नाममात्र है। दुकानों से ज्यादा फड़ और ठेली वाले तहबाजारी देते हैं। नगर निगम क्षेत्र में हजारों फड़ और ठेलियां लगती हैं। नगर निगम के सर्वे में 2865 फड़ और ठेलियां पंजीकृत हैं। इनमें भी प्रतिदिन दो हजार फड़ और ठेली वालों से 25 रुपये तहबाजारी ली जाती है।
इस लिहाज से नगर निगम को फड़-ठेलियों से सालाना 60 लाख रुपये तहबाजारी मिलती है। वहीं, निगम की आवंटित दुकानों से मात्र 57 लाख रुपये मिलता है। निगम की शहर में 1176 दुकानें आवंटित हैं। किराए में एकरूपता नहीं होने से एक ही लोकेशन और साइज की दुकानों का किराया अलग-अलग है।
दुकान किरायेदारी में पारदर्शिता लाने और राजस्व वृद्धि के लिए निगम प्रशासन ने प्रति वर्ग फुट किराया निर्धारित कर दिया है। नई व्यवस्था में दुकान किराए से निगम को सालाना करीब डेढ़ करोड़ का राजस्व मिलेगा।
80 लाख में बिक गई दुकान
नगर निगम की आवंटित दुकानों को व्यापारी किराए पर उठाने के साथ ही बेच भी देते हैं। पटेल चौक में एक दुकान 80 लाख रुपये में बेची गई है। निगम प्रशासन के मुताबिक आवंटित दुकानों का किराया काफी कम है। कई दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने निगम की दुकानों को मार्केट रेट पर थर्ड पार्टी को किराए में उठाया है, लेकिन कागजों में दुकान आवंटी के नाम ही चल रही है। निगम सूत्रों के मुताबिक पटेल चौक में निगम की एक दुकान को 80 लाख में बेचा गया। इसका नामांतरण भी हो गया।
एकमुश्त में मिलेगी छूट
नई किराएदारी व्यवस्था में कोई दुकानदार पूरे साल का किराया वित्तीय वर्ष के शुरुआत में एकमुश्त जमा करता है तो 10 फीसदी किराए में छूट मिलेगी। वहीं हर महीने पहले सप्ताह में किराया जमा करता है तो पांच फीसदी की छूट दी जाएगी। पांच साल में 12:5 फीसदी किराया वृद्धि होगी। नामांतरण में किराया वृद्धि की व्यवस्था खत्म कर दी है, जो कि तीन से छह गुना तक होती थी। नामांतरण में विरासतन शुल्क 5700 रुपये निर्धारित है।
समर्थन में आए निगम कर्मी
हल्द्वानी। दुकान किराया प्रतिवर्ग फुट करने से व्यापारियों के विरोध के बाद नगर निगम के कर्मचारी संगठन निगम के समर्थन में कूद पड़े हैं। नगर निकाय कर्मचारी महासंघ और नगर निगम इंपलाइज यूनियन ने किराया प्रति वर्ग फुट को वाजिब बताते हुए इसे पारदर्शी व्यवस्था ठहराया है। यूनियन अध्यक्ष रितेश बेलवाल ने कहा कि दुकान किराए में असमानता होने से निगम को राजस्व नुकसान हो रहा था।
नई व्यवस्था से निगम की आमदनी बढ़ेगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी। महासंघ अध्यक्ष देवेंद्र लाल साह और मंत्री नरेंद्र सिंह परमार ने कहा कि व्यापारी विरोध करते हैं तो निगम प्रशासन किरायेदारी अधिनियम के तहत दुकानदारों को बेदखल कर नए सिरे से दुकानों का आवंटन कराए।