मेघ खेत और जंगल पर अमृत बन कर बरसे हैं। कृषि अधिकारियों को उम्मीद है कि इसी तरह बारिश होती रही तो इससे हजारों टन का धान का उत्पादन बढ़ सकता है। बारिश से जंगल भी लकदक होने की आस जंगलात को है। खासकर पिछले सालों में अर्द्ध भाबर, भाबर के इलाके में प्लांटेशन प्रभावित हो रहा था, वहां नया जंगल तैयार होगा।
नैनीताल जिले में 27 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ की फसल बोयी गई है। इसमें भी 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केवल धान ही लगाया गया है। इन काश्तकारों के साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों के बरसात ने चेहरेे खिला दिए हैं। पहले अनुमान था कि धान का 32 हजार टन तक उत्पादन होगा, लेकिन फिलहाल बारिश के ट्रेंड से अब उत्पादन 34 हजार टन तक बढ़ने का अनुमान है।
मुख्य कृषि अधिकारी डी. कुमार कहते हैं कि जिले में 40 प्रतिशत भूमि असिंचित है, इस बारिश से इस क्षेत्र को खासकर फायदा हुआ है। धान ही नहीं अन्य फसलों को भी लाभ होने की संभावना है, लेकिन 4500 हेक्टेयर में बोयी गई दलहन फसल (उड़द, सोयाबीन, अरहर आदि) को लेकर काश्तकारों को थोड़ा सचेत होने की जरूरत है।
अगर बारिश का पानी खेत में रुका तो नुकसान हो सकता है। इस बार पूरे सीजन में कुल 1400 मिलीमीटर बरसात होने की संभावना थी, लेकिन जिस तरह से इस बार बारिश हो रही है यह पैमाना और बढ़ सकता है।
तीन साल बाद अर्द्ध भाबर और भाबर के इलाकों में भरपूर बारिश हो रही है। पश्चिम वृत्त वन संरक्षक सुरेंद्र मेहरा कहते हैं कि तराई केंद्रीय, तराई पूर्वी आदि वन प्रभागों में बीज बुआन विधि से मिश्रित वनों को तैयार करने की योजना पर काम किया जा रहा है, लेकिन पिछले सालों में बरसात कम होने से अपेक्षानुसार परिणाम नहीं आ रहे थे।
इस बार बरसात से भाखड़ा, बरहैनी, गदगदिया जैसे इलाकों में बीजों के बेहतर ढंग से अंकुरण और फिर पौधे तैयार होने की संभावना है। इस बार करीब 2000 हेक्टेयर में प्लांटेशन का लक्ष्य है, जिसमें बीज बुआन के अलावा पौधे रोपण कर प्लांटेशन का काम किया जा रहा है।