मरीजों का इलाज करने वाले स्वास्थ्य विभाग के भवनों को ही उपचार की दरकार है। करीब 2.42 करोड़ की लागत से बने सीएमओ कार्यालय की छत पहली बरसात में ही टपकने लगी है। वहीं रैमजे अस्पताल और बीडी पांडे अस्पताल की छतें भी बारिश के पानी को रोक पाने की स्थिति में नहीं हैं। इससे स्वास्थ्य अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ ही मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐतिहासिक रैमजे परिसर स्थित सीएमओ कार्यालय भवन जर्जर हो गया था जिसे एक दशक पूर्व अस्पताल को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बाद विभाग ने कार्यालय भवन बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया। 2022 में 2.42 करोड़ की लागत से नए कार्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ। काम पूरा होने के बाद बीते वर्ष 2024 में सीएमओ कार्यालय नए भवन में शिफ्ट किया गया, लेकिन पहली बरसात में इस भवन की छत टपकने लगी है।
बीडी पांडे अस्पताल में बेड खिसकाकर पानी से बचाने की हो रही जुगत
भवाली सेनिटोरियम में धूल फांक रहीं मशीनें
लाखों मरीजों को इलाज दे चुका 378 बेड वाला भवाली टीबी सेनिटोरियम अस्पताल आज खुद बीमार है। एक ओर यहां कमरों में बंद मशीनें धूल फांक रही हैं तो अस्पताल के कई भवन जर्जर हो चुके हैं। आज सेनिटोरियम केवल 60 बेड का अस्पताल रह चुका है। आज भी देश के कई राज्यों से टीबी के गंभीर रोगी यहां इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल के प्रभारी पीएमएस डॉ. संजीव खर्कवाल ने बताया कि वर्ष 2004 में सेनिटोरियम को चेस्ट स्पेशलिटी अस्पताल बनाने की बात उठी थी। इसके लिए अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड मशीन व सेंट्रल ऑर्गनाइज्ड मशीनें लगाई गईं, लेकिन आगे कोई प्रयास नहीं हुआ जिसके बाद सभी मशीनें खराब हो गईं। भवन खराब होने और पानी गिरने से एक्सरे मशीन भी खराब हो गई है। यहां प्रतिदिन 40 से 50 मरीज भर्ती रहते हैं।