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खनन से किया माफिया ने नदी को खोखला

Wed, 06 Apr 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो/ हल्द्वानी
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खनन - फोटो : अमर उजाला
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पिछले सालों में बारिश कम होने से नदी में काफी कम मात्रा में रेता और पत्थर है। ऐसे में खनन व्यवसायी बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित इलाके में अवैध खनन कर रहे हैं। इलाके में लगाए गए सीमांकन पीलर भी तोड़ दिए गए हैं। साथ ही, नदी किनारे के जंगलों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यह खुलासा खुद वन विभाग और वन निगम की संयुक्त जांच में हुआ है।
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गौला में 54 लाख घनमीटर खनिज निकासी का लक्ष्य है। 2014-15 में सीएसडब्ल्यूआरटीआई (देहरादून) ने गौला का अध्ययन कर खनिज मात्रा का आकलन किया। इसमें रेता, बजरी की मात्रा कम देखते हुए 42 लाख तक घनमीटर ही निकासी कराने की संस्तुति की। इसके बाद जब खनन रोका गया तो देहरादून तक हंगामा मच गया। बाद में तय लक्ष्य के आधार 54 लाख घनमीटर ही खनिज निकाला गया।

पिछले साल भी बरसात कम होने और पत्थर कम आने की बात कही जा रही थी। यह स्थिति मौजूदा खनन क्षेत्र में है। जिन इलाके में खनन होना है, वहां पर पत्थर, रेता कम है। ऐसे में खनन से जुड़े लोग प्रतिबंधित इलाके में अवैध खनन कर रहे हैं। यह काम इंद्रानगर, आंवला चौकी, हल्दूचौड़, देवरामपुर और बेरीपड़ाव के गेट पर ज्यादा और धड़ल्ले से जारी है। खनिज निकालने के सीमांकन पीलर (प्रतिबंधित इलाके को बताने वाले) को ध्वस्त किया गया है और जहां पर खनन बंद है वहां से खनिज निकाला जा रहा है।
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साथ ही, प्राकृतिक तौर पर नदी के किनारे स्वत: ही जंगल आता है, जो पर्यावरण और नदी की दृष्टि महत्वपूर्ण होता है, उस इलाके में भी खनन किया जा रहा है। इसमें रिजनरेशन वाला जंगल (प्राकृतिक पुनरोत्पादन) को काफी नुकसान पहुंचाया गया है। यह बात वन विभाग और वन निगम की संयुक्त टीम के निरीक्षण में सामने आई है, इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी गई है।

वन क्षेत्राधिकारी गौला चंदन अधिकारी का कहना है कि नदी में खनिज कम होने के कारण प्रतिबंधित इलाके में लोग अवैध खनन करने के लिए घुस रहे हैं। संयुक्त टीम की रिपोर्ट मिली है। इसके आधार पर तत्काल अवैध खनन करने वाले 37 वाहनाें की निकासी रोक दी गई है।
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-प्रतिबंधित इलाके में धड़ल्ले से अवैध खनन
-वन विभाग और वन निगम की संयुक्त जांच में खुलासा
- बरसात न होने से नदी में नहीं है पत्थर, रेता
- सीमांकन पीलर तोड़ा गया, जंगल को भी नुकसान 
- 37 वाहनों की निकासी रोकी गई

 
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