गौला नदी से अवैध खनन के आरोप में जुर्माने की कार्रवाई पर वन निगम ने भी मोर्चा खोल दिया है। वन निगम ने प्रशासनिक छापामारी की कार्रवाई को गलत ठहराया है। वन निगम के आरएम ने कहा कि वन विभाग की गलती का खामियाजा निगम नहीं भुगतेगा। दस करोड़ का जुर्माना किसी कीमत पर नहीं भरा जाएगा।
जिला प्रशासन ने जिले भर में खनन माफियाओं के खिलाफ छापामारी अभियान चलाया है। स्टाकिस्टों और क्रशरों में छापामारी के बाद अब नदियों में छापामारी हो रही है। नदियों में छापामारी में अवैध खनन पकड़े जाने पर वन निगम पर ही 10 करोड़ का जुर्माना लगाया चुका है। जुर्माने के बाद वन निगम ने चुप्पी तोड़कर कार्रवाई को गलत ठहराया है। वन निगम के आरएम एमपीएस रावत ने कहा कि वन विभाग ने गौला में कई जगहों पर खनन के लिए सीमांकन तय नहीं किया है। देवरामपुर गेट में सबसे अधिक परेशानी हो रही है। वन विभाग के सीमांकन पिलर ढह चुके हैं। कई बार पिलर लगाने के लिए पत्राचार किया जा चुका है।
आरएम ने कहा कि वन विभाग सुनने को तैयार नहीं है। नदी में कई और जगहों पर भी सीमांकन पिलर गायब हैं। ऐसे में कहां से खनन करें इसकी जानकारी देने वाला कोई नहीं है। आरएम ने कहा है कि पहले दिन सिटी मजिस्ट्रेट ने बगैर किसी सूचना के छापा मारा और अंदाजे से नपाई कर दी। अगले दिन एसडीएम ने छापा मारा और डीएलएम को बुलाया गया। लेकिन एसडीएम ने उनकी एक भी नहीं सुनी और गलत ढंग से जुर्माना लगा। उन्होंने कहा कि जुर्माना जमा नहीं करेंगे। जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाएंगे।