रामनगर। रामगंगा नदी में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) की ओर से शोध की तैयारी की जा रही है। नदी में आ रहे तमाम तरह के बदलावों का वन और वन्य जीवों के रहन-सलन पर क्या असर पड़ रहा है, शोध से इसका पता चलेगा। सीटीआर प्रशासन ने वर्ल्डवाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ), वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), उत्तराखंड स्टेट एप्लीकेशन सेंटर (यूएसएसी) के साथ कॉन्फ्रेंस में नदी के जलस्तर व पानी की गुणवत्ता समेत अन्य बिंदुओं पर अध्ययन के लिए योजना बनाई। मार्च माह से शोध का कार्य शुरू किया जाएगा।
शुक्रवार को मरचुला स्थित एक रिजॉर्ट में शुक्रवार को हुई कार्यशाला में सीटीआर निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि रामगंगा नदी कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से होते हुए यूपी तक जाती है। टाइगर रिजर्व में नदी घड़ियाल, उदबिलाऊ जैसे जलीय जंतुओं के साथ ही बाघ, हाथी जैसे दूसरे जीवों के लिए भी जीवनदायिनी मानी जाती है। समय के साथ-साथ नदी में प्रदूषण बढ़ गया है। नदी में पानी का प्रवाह कम होने के साथ सिल्ट बढ़ने जैसे कई बदलाव भी देखे गए हैं। इन कारणों से वनों और वन्यजीवों के रहन-सहन में क्या बदलाव आया है, यह शोध से पता चलेगा। शोध के बाद पानी का प्रवाह, सिल्ट, प्रदूषण, पानी की गुणवत्ता का भी पता चल सकेगा। बताया कि फरवरी माह से पानी की गुणवत्ता व प्रवाह जांचने के लिए उपकरण लगाए जाएंगे। मार्च माह से अध्ययन का कार्य शुरू किया जाएगा। नदी में प्रदूषण रोकने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता व सफाई अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान डीएफओ कालागढ़ तरूण श्रीधरा, डॉ. जेए जॉनसन, सुरेश बाबू, डॉ. मिराज अनवर, डॉ. नीलम रावत, डॉ. एचएस बर्गाली, अजय कुमार, शंकर दत्त, राकेश खत्री, सुमंथा घोष, एजी अंसारी आदि मौजूद रहे।