हिमालयी क्षेत्र के लिए उच्च तकनीक युक्त सफल बिजली परियोजनाओं के निर्माण के साथ ही सिंचाई, पेयजल और आजीविका पर सामंजस्य बिठा सकने वाली परियोजना पर कुमाऊं विवि, दिल्ली विवि और यूएसए की एरिजोना विवि मिलकर शोध कार्य करेंगे, इसका प्रोजेक्ट तैयार हो चुका है। कोशिश है कि शोध से ऐसा निष्कर्ष मिले जिससे हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर बिजली उत्पादन के साथ ही सिंचाई, पेयजल की पर्याप्तता और आजीविका भी बेहतर हो सके।
कुविवि डीएसबी परिसर के भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. पीसी तिवारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान कोलंबो (श्रीलंका) के सहयोग से इस परियोजना पर शोध कार्य किया जाना है। इसमें मुख्य सहयोगी कुमाऊं विश्वविद्यालय है। परियोजना के शोध के लिए दिल्ली विवि और एरिजोना विवि (अमेरिका) भी पार्टनर के रूप में सहयोग कर रहे हैं। प्रो तिवारी ने बताया कि शोध कार्य शुरू करने से पूर्व 18 से 20 फरवरी तक देहरादून में उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
इसमें शोध से संबंधित तमाम बिंदुओं पर विचार किया जाएगा। जिसमें मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्र के लिए किस तरह की बिजली परियोजनाएं बनाई जाएं जो कि पर्यावरण की दृष्टि से नुकसानदेह न हो, शामिल रहेगा। इसके साथ ही सिंचाई के वैज्ञानिक तरीकों और पेयजल के उचित दोहन का भी प्रबंध किया जा सके। इन बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद दोनों सरकारें मिलकर पालिसी बनाएंगी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान कोलंबो पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए विश्व के अन्य देशों बांग्लादेश, नीदरलैंड, चाइना को भी अलग-अलग परियोजनाओं के शोध के लिए सहयोग कर रहा है।