नाटक लहरों के राजहंस के एक भावपूर्ण दृश्य में मंथन और मानसी
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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में पत्रकारिता और जनसंचार विभाग की ओर से नांदी थिएटर मुंबई और विक्टोरियस थिएटर, कल्चरल एंड फिल्म सोसायटी मुंबई के सहयोग से मोहन राकेश की ओर से लिखित ‘लहरों के राजहंस’ नाटक की प्रस्तुति ने समा बांध दिया।
जाने माने नाट्य व रंगकर्मी मास्टर ऑफ थिएटर आर्ट्स संजय पंडित के निर्देशन में पत्रकारिता विभाग में बीते दो माह से नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा था। इस दौरान संजय पंडित की ओर से निर्देशित नाटक तैयार किया गया जिसका मंचन शुक्रवार को परिसर के एएन सिंह हाल में किया गया।
नाटक का केंद्रीय पात्र तथा व्यक्ति के मन के प्रतीक गौतम बुद्ध के सौतेले भाई नंद के मानसिक द्वंद्व के ताने बाने पर रचित नाटक में नंद गौतम बुद्ध से प्रभावित होकर भिक्षु बनना चाहता है लेकिन अपनी पत्नी सुंदरी के प्रेम में भी बंधा है। नंद की रूप गर्विता पत्नी सांसारिकता की प्रतीक है। नंद के पात्र में मंथन रस्तोगी और सुंदरी के रूप में मानसी शर्मा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुनीत सिंह, योगिता तिवारी, राहुल मल्ल, सौम्यता बिष्ट, आरती राजपूत, नवल आर्या, महेंद्र कुमार, कृष्णा बिष्ट, रजत जोशी, लक्ष्मी मलारा, अनमोल आर्या ने भी बेहतरीन अभिनय किया।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ कलाकार इदरीस मलिक ने संजय पंडित, सहायक निर्देशिका बबीता विश्वकर्मा की सराहना की। इससे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. गिरीश रंजन तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया और सहायक प्रो. पूनम बिष्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। रंगकर्मी रीतेश सागर ने भी कलाकारों को शुभकामनाएं दीं।