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मरीज लगाता रहा इलाज की गुहार, नहीं पसीजे डॉक्टर

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प्रतीकात्मक।
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रामनगर (नैनीताल)। रामनगर में डॉक्टरों की संवेदनहीनता के चलते एक दिव्यांग मरीज इलाज के इंतजार में करीब छह घंटे तक सरकारी अस्पताल परिसर में पड़ा रहा। नायब तहसीलदार के कहने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को भर्ती करने के बजाय एंबुलेंस से घर भेज दिया। अब प्रशासन मामले में जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कह रहा है।
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रामनगर हनुमानगढ़ी निवासी अंकुर अग्रवाल कई दिनों से बीमार था। घर पर देखरेख करने वाला नहीं होने पर पड़ोसियों ने शुक्रवार को 108 एंबुलेंस से उसे अस्पताल पहुंचाया। अंकुर ने बताया कि सुबह 11 बजे एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने देखा और साथ में तीमारदार नहीं होने के कारण इलाज नहीं किया और न ही भर्ती किया। चलने-फिरने में अक्षम अंकुर गुहार लगाता रहा कि या तो अस्पताल प्रशासन उसे भर्ती कर ले या फिर उसके घर छोड़ दे पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे मामले की जानकारी लेने नायब तहसीलदार वीर सिंह चौहान अस्पताल पहुंचे। नायब तहसीलदार को जानकारी मिली कि एक मरीज सुबह 11 बजे से इलाज नहीं मिलने के बाद अस्पताल परिसर के बाहर बैठा हुआ है। इस पर नायब तहसीलदार ने अंकुर से पूछताछ की और अस्पताल प्रबंधक को फोन पर मरीज को भर्ती करने के लिए कहा। उसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने मरीज को भर्ती करने के बजाय 108 एंबुलेंस से उसे कोसी रोड पर हनुमानगढ़ी स्थित उसके घर छुड़वा दिया।
जांच के बाद होगी कार्रवाई : एसडीएम
अस्पताल के प्रबंधक डॉ. अनमोल ठाकुर ने बताया कि मरीज मनोरोगी था। अस्पताल में उनकी देखरेख करना मुमकिन नहीं था, इसलिए एंबुलेंस से उसे घर भिजवा दिया गया। एसडीएम विजयनाथ शुक्ल ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि मरीज को इलाज नहीं दिया गया होगा तो मामले की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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