अवैध खनन रोकने के लिए भले ही कितनी बातें की जाएं, लेकिन वन निगम के अफसर ही नहीं चाहते हैं कि यह रुके। इसी के चलते अब तक गौला के सभी गेटों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लग सके, जबकि खनन अगले महीने बंद हो जाएगा। वही, वन महकमा भी मामले में आंख बंद किए हुए है।
गौला के 12 गेटों पर खनन होता है। करीब ढाई माह पहले वन निगम अध्यक्ष हरीश धामी ने गौला गेटों पर छापा मारा और अफसरों से अवैध खनन रोकने की बात कही, लेकिन इसके लिए कुछ किया जा रहा है, यह दिख नहीं रहा है। अवैध खनन रोकने, अराजक लोगों पर नजर रखने और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र करने को 12 गेटों पर कुल 36 कैमरे (एक गेट पर तीन कैमरे लगेंगे, इसमें एक साफ्टवेयर रूम में, एक कांटे पर और एक बाहर की तरफ) लगाने की योजना बनी।
बताया जाता है कि इसके लिए सब कुछ तय हो गया, बताया जाता है कि इसके लिए वर्क आर्डर तक जारी हो गया । पर बाद में मामला ‘लटका’ दिया गया। यह क्यों लटका, कैमरे नहीं लगाने के पीछे देरी या कोई दूसरे कारण क्या हैं, इसके बारे में कोई बोलने को तैयार नहीं है।
यह होता है खेल
- ओवर लोड वाहन निकाले जाते हैं।
- सेटिंग से बिना रायल्टी के खनिज निकाला जाता।
- अराजकता कर भी वाहनों को निकाला जाता।
- मौके पर कोई भी साक्ष्य नहीं मिलता।
- अराजक लोगों का गेट पर जमावड़ा लगा रहता।
बाकी कामों के लिए तेजी
गोरा पड़ाव में गेट खोलना था तो इसके लिए हर स्तर पर तेजी हुई। बताया जाता है कि पहले शीशमहल-राजपुरा के बीच तय सर्वे की जगह पर नया गेट लगाने की तैयारी हो गई, लेकिन बाद में एक अफसर ने मौखिक आदेश कर गेट का काम रुकवा दिया। फिर सर्वे को ताक पर रखकर गोरा पड़ाव गेट खोलने की तैयारी की गई।