फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: हरिद्वार में अवैध खनन पर रोक का दावा, फिर भी जारी है खनन? हाईकोर्ट ने दस सितंबर तक बढ़ाई सुनवाई

Mon, 24 Aug 2026 11:01 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे अवैध खनन के मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को नियत की है। 
विज्ञापन
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए दस सितंबर की तिथि नियत की है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कोर्ट के आदेश पर हरिद्वार में अवैध खनन पर रोक लगी हुई है, दर्जनों स्टोन क्रेशर बंद है, प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए उन्हें सील किया है। जबकि याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कोर्ट के आदेश होने के बाद भी अभी भी अवैध खनन हो रहा है। जबकि राज्य सरकार की लीव टू अपील भी सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है।

विज्ञापन


गंगा को बचाओ को लेकर एनजीटी ने भी कडे़ आदेश जारी किए हुए है। हाईकोर्ट ने भी अपने पूर्व के आदेश में बदलाव करते हुए जारी आदेशों को सकताई से पालन करने को कहा है। लेकिन अभी तक किसी आदेश का अनुपालन नही किया जा रहा है। स्टोन क्रशर मालिको की ओर से कहा गया कि वे निर्धारित पालिसी के अनुरूप कार्य कर रहे थे। लेकिन उन्हें बिना सुने बंद करने के आदेश दे दिए गए, जो कि खनन नियमावली के विपरीत है। जबकि वे खनन से संबंधित सभी सेवा शर्तो को पूरा करते आए हैं। इसलिए खनन कार्य पर लगी रोक और उनके वाहनों को बहाल किया जाए। इसके जवाब में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि 30 जुलाई 2025 को कोर्ट ने अवैध संचालित स्टोन क्रशरों के संचालन पर रोक लगाई गई थी। उसके बाद भी इनके द्वारा अवैध रूप से खनन कार्य किया जा रहा है। इसका विरोध करते हुए स्टोन क्रशर मालिकों की तरफ से कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बाद उनके स्टोन क्रशर में लगे वाहन सीज हो चुके है। लिहाजा उनको रिलीज कराए जाने की अनुमति दी जाए। क्योंकि सीज किए गए वाहनों की किस्त भी बैंक को देनी है। जब से वाहन सीज हुए है उन पर बैंक का ब्याज भी बढ़ने लगा है।

लिहाजा वाहनों को भी रिलीज करने की अनुमति विभाग को दिए जाए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जो भी वाहन खनन के दौरान कोर्ट के आदेश पर सीज किये गए थे, उनकी नीलामी की जाए। उनसे मिलने वाली रकम को पर्यावरण की देख रेख मे खर्चा किया जाए।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार मातृ सदन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन कार्य किया जा रहा है जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है।
विज्ञापन


जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाए ताकि गंगा नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके। याचिका में कहा कि अब खनन कुम्भ क्षेत्र में भी किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसीजी बोर्ड गठित किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाए रखना है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें