विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने यूजीसी के नियमों, शिक्षा एवं सरकारी सेवाओं में जातिगत आरक्षण तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित विषयों नियमों तथा व्यवस्थाओं को खत्म कराने की मांग की है। उनका कहना है कि योग्यता, पारदर्शिता, समान अवसर, सामाजिक न्याय और प्रत्येक नागरिक की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इन विषयों पर व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
एक रेस्टोरेंट में हुई पत्रकार वार्ता में पूर्व दायित्वधारी प्रकाश हर्बोला ने शिक्षा और रोजगार में सभी युवाओं को समान अवसर देने, यूजीसी के नए नियमों, जातिगत आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट को समाप्त करने के प्रस्ताव पर खुली चर्चा कराने, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित लोगों को सहायता देने, नीति निर्माण में युवाओं की बात सुनने की मांग की। पूर्व ब्लाक प्रमुख लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने कहा कि कानूनी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो वास्तविक पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय दे तथा किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न होने दे। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत ने यूजीसी कानून की धारा 3 सी को संविधान के विरूद्ध बताया। कहा कि यह आपस में वैमनस्य पैदा करने वाली है इसलिए यूजीसी कानून तुरंत वापस होना चाहिए। तय किया गया कि बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर बैठक की जाएगी। वार्ता में भगवान चंद्र पंत, सत्येंद्र तोमर, योगेंद्र बिष्ट व भुवन चंद्र भट्ट मौजूद रहे।