जनता को 24 घंटे सेवा देने वाले थाने में जब पर्याप्त फोर्स और साधन मुहैया न हो तो कर्मचारियों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। शहर में कहने के लिए बनभूलपुरा अति संवेदनशील थाना है लेकिन यहां फोर्स चौकी के बराबर भी नहीं है। थाना बनने के 10 माह बाद भी थानाध्यक्ष को सीयूजी नंबर उपलब्ध नहीं हो सका है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार बनभूलपुरा थाना क्षेत्र की आबादी तीन लाख है। जनसंख्या के मद्देनजर शासन ने एक जनवरी 2015 से बनभूलपुरा रिपोर्टिंग चौकी को थाने के रूप में परिवर्तित किया। थाने के वजूद में आने के बाद तत्कालीन कप्तान ने अधीनस्थों को फोर्स बढ़ाने का भरोसा दिया था लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
यहां थानाध्यक्ष को लेकर दो उपनिरीक्षक, 22 सिपाही, तीन एचसीपी और दो हेड कांस्टेबल तैनात हैं। उच्चाधिकारियों के अनुसार अन्य थाने की तरह जनता को 24 घंटे सेवा देने के लिए घटनास्थल पर पहुंचना, शांति व्यवस्था को कायम करना और वीवीआईपी को महफूज रखना थाने के पुलिसकर्मियों की ड्यूटी है।
इस थाने की फोर्स बढ़ाने के लिए थानाध्यक्ष ने पिछले माह उच्चाधिकारियों को अनुरोध पत्र भेजा था लेकिन फोर्स नहीं बढ़ाई गई। इस थाने में सबसे अधिक मुकदमे दर्ज होते हैं लेकिन विवेचना करने के लिए पर्याप्त संख्या में दरोगा भी उपलब्ध नहीं है।
थाने में महिला हवालात और बैरक भी नदारद है। एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने जब अधीनस्थों से पूछा तो पता चला कि बनभूलपुरा और मुखानी थाने को सीयूजी नंबर भी नहीं उपलब्ध कराया गया है।