मान्यता प्राप्त गैर सरकारी संस्थाओं में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु निर्धारण की बाध्यता नहीं होगी। हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए एकलपीठ के उस आदेश को गलत ठहरा कर अपास्त कर दिया जिसमें कहा गया था कि सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज में सरकारी कॉलेजों की तर्ज पर निर्धारित अधिकतम आयु सीमा के अनुरूप ही प्रवक्ता के पद पर नियुक्तियां की जाएं।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। प्रबंधक गोविंदी देवी इंटर कॉलेज बेलपोखरा, प्रबंधक इंटर कॉलेज लखनमंडी और हल्द्वानी निवासी इंदिरा जोशी ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी।
अपील में कहा गया था कि एकलपीठ के समक्ष हल्द्वानी निवासी पूजा पंत ने विभिन्न मान्यता प्राप्त स्कूलों में प्रवक्ता अंग्रेजी के पदों के लिए 2015 में जारी विज्ञापन को चुनौती दी थी कि विज्ञापन में उच्च आयु सीमा का वर्णन नहीं है जिस पर एकलपीठ ने पूजा पंत के पक्ष में निर्णय दिया था। जिसके चलते इन पदों पर चयन प्रक्रिया रुक गई थी।
एकलपीठ के इस आदेश को इंदिरा जोशी समेत प्रबंध गोविंदी देवी इंटर कॉलेज बेलपोखरा और प्रबंधक इंटर कॉलेज लाखन मंडी ने विशेष अपील दायर कर इस आधार पर चुनौती दी थी कि सहायता प्राप्तकॉलेजों में प्रवक्ता के पद पर चयन के लिए वर्तमान प्रचलित विनियमों व अधिनियम में अधिकतम आयु सीमा वर्णित करने के लिए कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए एकलपीठ का फैसला गलत है।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपीलार्थियों की अपील को स्वीकार करते हुए एकलपीठ के फैसले को पलट दिया। इस आदेश के बाद संस्थानों में नियुक्ति की प्रक्रिया पर लगी रोक हट चुुकी है।