नैनीताल। हाईकोर्ट ने राज्य के वनों पर लग रही आग को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार व वन विभाग को सोमवार 2 मई को आग लगने से नुकसान संबंधी आकडें कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा है कि बंदरों की समस्या के समाधान पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 2015 में अल्मोडा के आयुष व 51 अन्य छात्रों ने खत (पोस्ट कार्ड) के माध्यम से कहा था कि जंगली बंदर उन्हें स्कूल जाने में परेशान करते हैं और उनका खाना छीनकर लेते हैं।
पूर्व में न्यायालय ने सरकार व वन विभाग से कार्रवाई करने को कहा था। साथ ही इस संबंध में जवाब देने को कहा था। सरकार की ओर से पुन: जवाब दाखिल करने के लिए समय लिया गया। वहीं सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अकरम ने कोर्ट को जंगलों में लग रही आग के संबंध में अवगत कराते हुए बताया कि उत्तराखंड राज्य में लग रही आग से वन्य जीव को हानि हो रही है उसके साथ ही वन संपत्ति, पशु पक्षी, जानवर इत्यादि मारे जा रहे है। याचिकाकर्ता की ओर से इसके रोकथाम की व्यवस्था करने की मांग की गई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग व सरकार को सोमवार तक आकडे पेश करने को कहा है।