पत्रकारों को जानकारी देते होटल एसोसिएशन के पदाधिकारी। संवाद
नैनीताल। अव्यावहारिक यातायात प्लान, खराब पुलिसिंग, फेक रील्स, चुंगी व पार्किंग शुल्क बढ़ोतरी के चलते नैनीताल से सैलानियों का मोह भंग हो रहा है। नैनीताल समेत प्रदेश में पर्यटन का ग्राफ गिर रहा है। मुख्यमंत्री को निजी स्तर पर इसका संज्ञान लेना चाहिए। यह बात नैनीताल के होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कही। उन्होंने कहा कि पर्यटन कारोबार की बढ़ोतरी के संबंध में एसोसिएशन भी सीएम पुष्कर सिंह धामी से शीघ्र मुलाकात करेगी।
शुक्रवार को होटल एसोसिएशन की पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने कहा कि पूरे उत्तराखंड के पहाड़ों में पुलिस की व्यवस्था खराब है। जहां एक ओर सरकार पर्यटकों को यहां आने के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रचार प्रसार कर रही है वहीं दूसरी ओर पुलिस का व्यवहार और ट्रैफिक प्लान सैलानियों को यहां से जाने को मजबूर कर रहा है। सरकार को इस संबंध में संज्ञान लेने की जरूरत है। अन्यथा पर्यटन कारोबारियों के साथ ही राजस्व का भी नुकसान होगा। कहा फेक रील से भी पर्यटन को नुकसान हो रहा है, सरकार को इसमें नीति और कानून बनाना चाहिए। इस मौके पर महासचिव वेद साह, उपाध्यक्ष आलोक साह, कोषाध्यक्ष सीपी भट्ट, उप सचिव स्नेह छावड़ा, पीआरओ रुचिर साह, आलोक साह, रमनजीत सिंह, जतिन जेठी आदि मौजूद रहे। संवाद
नैनीताल में 50 फीसदी वैध तो इतने ही अवैध पर्यटन कारोबारी
नैनीताल। एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने कहा कि नैनीताल में पचास फीसदी वैध तो इतने ही अवैध पर्यटन कारोबारी हैं। करीब चार सौ होटल, होम-स्टे व गेस्ट हाउस पंजीकृत हैं, जबकि चार सौ से अधिक होटल व होम स्टे गैर पंजीकृत है। इस पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। यह राजस्व और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा है। सभी के खिलाफ कार्रवाई या फिर पंजीकृत करने की जरूरत है।
यह भी हैं समस्याएं
नैनीताल। प्रदेश की सड़कों का हाल बुरा है। सड़कों में गड्ढे होने से पर्यटकों को हिल स्टेशन पर पहुंचने में दिक्कतें होती हैं। वहीं वर्ष 1976 में बना एयरपोर्ट ठीक से काम नहीं करता। आए दिन फ्लाइट रद्द होती हैं। इसके अलावा टोल टैक्स 300, जबकि पार्किंग शुल्क 500 को भी कम करने की जरूरत है। इस संबंध में पालिका से वार्ता हुई है।