नैनीताल। हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा देने के लिए नैनीताल के एक निजी होटल में मंथन किया गया। इसमें उत्तराखंड के साथ ही कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से पहुंचे विशेषज्ञों ने सेब उत्पादन के लिए मार्केटिंग पॉलिसी बनाए जाने पर जोर दिया। कहा कि अफगानिस्तान, ईरान और तुर्की से आ रहे सेब से प्रदेश के बागवानों को मार्केट नहीं मिल रही है।
हिल स्टेट एग्रीकल्चर फोरम के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों के समक्ष पहले भी कई बार यह मामला उठाया जा चुका है। बावजूद इसके अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ईरान और तुर्की से आयात सेब पर कम इनवाइस काटी जा रही है। इससे केंद्र सरकार को भी राजस्व का नुकसान होता है। कहा कि भारत में 40 देशों से सेब का आयात किया जाता है जिस कारण भारत के किसानों को नुकसान होता है। इसलिए विदेश से सेब का कम आयात किया जाए, ऐसा करने से भारत के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
उन्होंने दावा किया है कि भारत में होने वाले सेब की वैधता 15 से 20 दिन होती है, जबकि अन्य देशों से आने वाले सेब की वैधता एक सप्ताह से भी कम होती है। बैठक में तय किया गया कि राज्यों के सभी फसलों को उच्चतम मूल्य दिलाने के लिए वह केंद्र व राज्य सरकार से मांग की जाएगी। इस मौके पर प्रवीण शर्मा, गोपाल उप्रेती, कैलाश मांटा, गोधन, देवेंद्र बिष्ट, डॉ. नारायण सिंह, मंजूर अहमद, जावेद अहमद, मो. अफरद आदि मौजूद रहे।