फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आगे खाई, पीछे कुआं और बीच में मेयर 

Sun, 07 Aug 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर निगम की दुकानों के किराये का मुद्दा मेयर के लिए गले की फांस बन गया है। व्यापारियों के विरोध और कांग्रेसियों की राजनीति के बाद मेयर अब भाजपाइयों के निशाने पर भी आ गए हैं। ऐसे में मेयर के आगे खाई तो पीछे कुआं वाली स्थिति हो गई है। 
विज्ञापन


मेयर डॉ. जोगेंद्र सिंह रौतेला हल्द्वानी सीट से भाजपा से विधानसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी कर चुके हैं। इससे प्रतिद्वंद्वी ही नहीं भाजपा के संभावित प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। ऐसे वक्त में नगर निगम बोर्ड से दुकानों का किराया वृद्धि के प्रस्ताव पास हुआ है। इसके बाद से व्यापारियों ने मेयर के खिलाफ मोर्चा खोला है।

व्यापारियों के आंदोलन को कांग्रेस भुनाने में जुटी है। वित्तमंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश ने इसकी कमान संभाल ली है। किराया वृद्धि के खिलाफ संशोधन प्रस्ताव बोर्ड में लाए जाने के लिए कांग्रेसी पार्षदों की कमेटी भी बन चुकी है। दुकानों का बढ़ा किराया कम हुआ तो व्यापारियों की सहानुभूति के साथ पूरा श्रेय कांग्रेस को मिलेगा।
विज्ञापन


विधानसभा चुनाव में व्यापारियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। व्यापारी वर्ग एक बड़ा वोट बैंक है। उनकी नाराजगी झेलकर कोई भी प्रत्याशी मैदान में नहीं टिक सकता है। कांग्रेस के दुकान किराया मुद्दे को भुनाने के बाद भाजपा भी हाथ-पैर मारने की कोशिश में जुट गई है। पिछले दिनों भाजपाइयों के मेयर की घेराबंदी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। भाजपाइयों को लगने लगा है कि व्यापारियों की नाराजगी भाजपा के लिए 2017 में महंगी पड़ सकती है।

मेयर अपने ही भाजपाइयों के निशाने पर हैं। मेयर भी बखूबी जानते हैं तीर उनके हाथों से निकल चुका है। किराया बढ़ने से व्यापारियों की नाराजगी उनके राजनीति सफर में रोड़ा बन सकती है। किराया कम होने से उनके बैक फुट पर आने से भी नुकसान उन्हीं को झेलना है। 

>> दुकानों के किराया की नीति में बदलाव मेरा निजी फैसला नहीं है। बोर्ड सदस्यों के सामूहिक सहमति के बाद ही प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है। इस मुद्दे पर राजनीति हावी होने के बाद प्रस्ताव पारित करने वाले पार्षद ही विरोध जताने लगे हैं। नगर निगम एक्ट में स्वीकृत प्रस्ताव को मेरे स्तर से खारिज करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस मामले में कानून के जानकारों की राय ली जा रही है। - डॉ. जोगेंद्र सिंह रौतेला, मेयर। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें