हल्द्वानी। वर्तमान समय में बेरोजगारी किसी अभिशाप से कम नहीं है। ऐसे में जिलों में आयोजित होने वाले रोजगार मेलों में नौकरी मिलना युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता लेकिन शहरों में सीमित वेतन में इनका गुजरा नहीं हो पाता और ये नौकरी छोड़ देते हैं। इनमें अधिकतर गांव के युवा शामिल होते हैं। हालांकि सेवायोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के पास नौकरी छोड़ने वाले लोगों के आंकड़े नहीं हैं।
प्रदेश में हर वर्ष युवाओं को नौकरी देने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है। अधिकतर रुद्रपुर सिडकुल, सितारगंज और हरिद्वार की कंपनियां युवाओं का योग्यता के आधार पर रोजगार के लिए चयन करते हैं। इस दौरान उन्हें 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन बताया जाता है। घर से कोसों दूर इतने कम वेतन में गुजारा नहीं हो पाने के कारण युवा नौकरी छोड़ने पर विवश हो जाते हैं।
nबीटेक-एमटेक पास युवा भी हैं शामिल बीटेक, एमटेक, पॉलीटेक्निक, आईटीआई, ग्रेजुएशन जैसी डिग्री लेकर युवा इन मेलों में उत्साह के साथ प्रतिभाग करते हैं, लेकिन जैसे ही बात वेतन पर आती है तो उन्हें झटका लगता है। युवाओं का मनोबल टूट जाता है। रोजगार मेलों से मिलने वाले रोजगार की कोई गारंटी भी नहीं होती है। चयन के बाद कब तक कंपनी काम कराएगी यह भी निर्धारित नहीं है।