हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी आवास खाली किए जाने के मामले पर सुनवाई के बाद सरकार को बाजार दर पर पूर्व मुख्यमंत्रियों से किराया वसूलने का ब्यौरा मांगा है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने भी कोर्ट को बताया कि उन्होंने सरकारी आवास खाली कर दिया है।
बृहस्पतिवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। रूलक (रूरल लिटिगेशन एंड इनटाइटलमेंट केंद्र) ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकार आवास और अन्य सुविधाएं दे रही है।
इससे आम जनता के धन का दुरुपयोग हो रहा है। याची का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास में निवास की अवधि का किराया भी वसूला जाए। पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में आवास खाली करने के बारे में कोर्ट को अवगत कराते हुए कहा कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने आवास खाली कर दिए हैं।
पूर्व में हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने शपथपत्र दाखिल कर अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा था कि उन्हें आवास खाली करने के लिए 31 मार्च तक का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाए।
बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनके द्वारा बीती शाम को आवास खाली कर दिया गया है। इस आधार पर उनके द्वारा दाखिल शपथपत्र को वापस ले लिया गया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि आवास खाली कर दिए गए हैं, लेकिन उसका किराया अभी तक नहीं दिया गया है।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि नियत करते हुए सरकार को इस संबंध में शपथपत्र दाखिल कर यह बताने को कहा है कि अभी तक किस प्रकार और किस किससे किराया वसूला जा चुका है।