तराई-भाबर में पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों की जून में होने वाली बैठक में जमरानी बांध पर अंतिम मुहर लग जाएगी। साथ ही केंद्र सरकार ने हल्द्वानी तक गैस पाइप लाइन बिछाने के प्रस्ताव पर सहमति जता दी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर बात हुई थी और 133 परिसंपत्तियों में 33 नहरें उत्तराखंड को मिल गई हैं। शेष सौ परिसंपत्तियों का मामला जून तक निपट जाएगा। इसी महीने दोनों प्रदेश के मुख्य सचिवों की बैठक होनी है और जून में दोनों प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की बैठक होनी है। जून में जमरानी बांध पर भी अंतिम मुहर लग जाएगी।
उसके बाद बांध का काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हास्पिटैलिटी यूनिवर्सिटी और आईआईटी स्तर का संस्थान उत्तराखंड में शुरू होगा। हास्पिटैलिटी विश्वविद्यालय के लिए केंद्र की ओर से 75 प्रतिशत का सहयोग मिलेगा, जबकि 25 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार खर्च करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गैस पाइप लाइन हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश में भी बिछेगी। हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश में मेट्रो सेवा के लिए मलेशिया की एक कंपनी से बात चल रही है। रावत ने कहा कि राज्य में सवा लाख परिवार बिजली से वंचित हैं।
इन परिवारों को सोलर ब्रीफकेस के रूप में सौगात दी जाएगी। अक्टूबर में सिंगापुर की कंपनी दस हजार सोलर ब्रीफकेस राज्य को देगी। सिंगापुर की कंपनी से उत्तराखंड में फैक्ट्री लगाने की बात भी हुई है। फैक्ट्री लगने से लोगों को रोजगार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2019 तक प्रदेश का कोई भी बच्चा निरक्षर न रहे। इस दौरान विधायक बंशीधर भगत, दीवान सिंह बिष्ट, नवीन दुम्का, संजीव आर्य, मनोज शाह, प्रदीप बिष्ट, विजय मनराल, रेनू अधिकारी, प्रकाश रावत, गजराज बिष्ट, महेंद्र अधिकारी, मजहर नईम नवाब, मोहन बिष्ट, नवीन पंत, तरुण बंसल, डॉ. अनिल डब्बू, विजय बिष्ट, बिंदेश गुप्ता आदि थे।
फ्लाई ओवर के लिए किया इशारा
मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में जाम की समस्या को सबसे अहम बताया। कहा कि फिलहाल ट्रैफिक का लोड कम करने के लिए रिंग रोड बनेगी। सीएम रावत ने कहा कि हल्द्वानी के लिए फ्लाई ओवर जरूरी है। कहा कि व्यापारी वर्ग को इससे परेशानी होगी, लेकिन इसके लिए उन्हें मन बनाना होगा।
पीएम को दी योजना का नाम बदलने की सलाह
मुख्यमंत्री रावत ने प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री सड़क योजना का नाम बदलने का सुझाव दिया। कहा कि उत्तराखंड में 13 प्रतिशत से कम कृषि भूमि है। योजना का नाम प्रधानमंत्री संपर्क मार्ग करने से पर्वतीय क्षेत्रों पर रोपवे या बांध को पार कराने के लिए नाव चलाई जा सकती हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय से दो दिन बाद फोन आया था और योजना को विस्तार से भेजने के लिए कहा गया था।
घोषणाएं नहीं सीधे शासनादेश करेंगे
मुख्यमंत्री ने इशारों में ही पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने कार्यकाल में घोषणाएं नहीं करेंगे। पिछली सरकार ने चार हजार घोषणाएं की थीं। सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि पुरानी एवं लंबित समस्याओं का मसौदा तैयार कर लें।
जिले में जाने से पहले उस पर काम किया जाएगा और जिले में सीधे शासनादेश लेकर ही जाऊंगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश में ऐसा राज्य हैं जहां विकास इकाई कम और प्रशासनिक इकाइयां ज्यादा हैं। राज्य में 110 तहसीलदार में मात्र पांच तहसीलदार कार्यरत हैं।
कहां चले गए यशपाल जी
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सर्किट हाउस में कुछ देर विश्राम करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के लिए पहुंचे। पत्रकारों से बात करने के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के लिए गए। संबोधन के दौरान सीएम ने विधायकों का नाम लेना शुरू किया।
इसी दौरान विधायक संजीव आर्य पूछा कि मंत्री यशपाल जी कहां चले गए। सीएम जब कार्यकर्ताओं को संबोधित करने जा रहे थे तो काबीना मंत्री यशपाल आर्य साथ थे मगर संबोधन शुरू होने के दौरान वे मौजूद नहीं थे। संजीव के उत्तर देने के बाद सीएम ने संबोधन शुरू कर दिया।
पार्टी विद द डिफरेंस में नहीं दिखा अनुशासन
भारतीय जनता पार्टी अनुशासन की बात करते नहीं थकती है। सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री के स्वागत को लेकर कार्यकर्ता पुलिस अधिकारियों से उलझे। पुलिस अधिकारी दरवाजे के पास भीड़ न लगाने का अनुरोध कर रहे थे।
इसके बाद सीएम के विश्राम कक्ष के पास भी अंदर जाने की होड़ लगी रही। कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मंच के आगे ही एकत्र हो गए और पीछे से लोग सामने से हटने के लिए अनुरोध कर रहे थे। बुके और गुलदस्ता देने एवं सीएम को चेहरा दिखाने की होड़ मची रही।