ट्रेन की टक्कर से तेंदुए के शावक की मौत हो गई। शुक्रवार सुबह तेंदुए का शव रेलवे पटरियों के किनारे पड़ा मिला है। घटना तड़के जैसलमेर से आने वाली रानीखेत एक्सप्रेस से होनी बताई जा रही है।
शहर के पॉश इलाके आवास-विकास में क्षेत्रवासी शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे टहलने निकले तो चौंक गए।
इलाके से गुजर रही ट्रेन की पटरियों के किनारे तेंदुए का शव पड़ा हुआ था। इस बीच सूचना पाकर तराई केंद्रीय वन प्रभाग के हल्द्वानी रेंजर पीसी जोशी के नेतृत्व में वन टीम भी मौके पर पहुंच गई। टीम तेंदुए का शव कब्जे में लेकर हल्द्वानी रेंज आफिस पहुंची।
जहां दोपहर में करीब 12 बजे पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीसी जोशी और डॉ. बीसी तिवारी के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। वन अधिकारियों के मुताबिक वह मादा तेंदुआ थी जिसकी उम्र करीब डेढ़ वर्ष थी। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ है कि ट्रेन की टक्कर लगने से तेंदुए की किडनी डैमेज हो गई जिसकी वजह से मौके पर ही मौत हो गई।
इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि शावक पटरी पार कर रहा होगा। शावक की खाल अकड़ने लगी थी जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत करीब सात-आठ घंटे पहले हुई थी। पोस्टमार्टम के बाद गुलदार का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
ट्रेन की चपेट में आने से तेंदुए की किडनी डैमेज हो गई थी, जिसकी वजह से मौत हो गई। तेंदुए के पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करा दिया गया है। तेंदुआ आबादी में कहां से आया इसका पता लगाया जा रहा है, वन टीम को अलर्ट किया गया है।
नवीन चंद्र पंत, उप प्रभागीय वनाधिकारी, तराई केंद्रीय
एक साल पहले भी खटीमा में ट्रेन से कटकर हुई थी तेंदुए की मौत
कुमाऊं में ट्रेन की चपेट में आने से तेंदुए की मौत का यह दूसरा मामला है। वन अधिकारियों के मुताबिक आम तौर पर तेंदुए ट्रेन की चपेट में नहीं आते हैं। इससे पहले करीब एक साल पहले खटीमा के चकरपुर में भी ट्रेन से कटकर तेंदुए की मौत हो गई थी।
एक साल पहले देखे गए मादा तेंदुए का शावक तो नहीं था
एक साल पहले आर्मी कैंट क्षेत्र में तेंदुआ और शावक देखे गए थे। उनकी सैन्य अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर से भी तलाश की थी लेकिन पता नहीं चला। अब आशंका जताई जा रही है कि जो मादा तेंदुआ कैंट में शावक के साथ थी वही सुबह तड़के शावकों के साथ आबादी की ओर आ रही होगी। हालांकि यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि आबादी से सटे छकाता रेंज से भी शावक आ सकता है।
कुत्तों के शिकार के लिए पटरी पर आते हैं गुलदार
सूत्रों के मुताबिक मुर्गा, बकरे का मीट बेचने वाले बचा, सड़ा गला मीट आवास विकास में रेलवे पटरी किनारे पर फेंक देते हैं जिन्हें खाने के लिए कुत्ते इकट्ठे होते हैं और इन कुत्तों के शिकार के लालच में तेंदुए पहुंचते हैं। पटरी पर मीट फेंकना बंद नहीं किया तो गुलदार फिर आबादी में घुसपैठ कर सकते हैं।
अभी खतरा टला नहीं है
तेंदुए के आने से साफ हो गया है कि सुबह तड़के वन्य जीव आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। यानी तेंदुए का यहां मूवमेंट है ऐसे में अगर सतर्कता नहीं बरती गई तो यह आबादी के लिए भी खतरा हो सकता है।