गौलापार (नैनीताल)। हल्द्वानी के सिविल जज (जूनियर डिविजन) एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि अरोड़ा की अदालत ने एक आपराधिक मामले में पुलिस की ओर से दाखिल अंतिम जांच रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस को मामले की दोबारा विवेचना करने के आदेश दिए हैं।
न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया मामले के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं की समुचित जांच नहीं की गई है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए पुनः विवेचना जरूरी है। मामला थाना चोरगलिया में वर्ष 2024 में दर्ज एक एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता चोरगलिया निवासी भुवन पोखरिया का आरोप था कि 15 दिसंबर 2024 की सुबह उसकी कार को एक अन्य वाहन ने रोक लिया था। कार से उतरे कुछ लोगों ने हथियार दिखाकर कार के शीशे तोड़ दिए और उनके परिवार के साथ मारपीट व अभद्रता की। शिकायतकर्ता ने पुलिस पर घटना को गंभीरता से न लेने और जांच में लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद उसने मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई। वहीं पुलिस का कहना था कि उसने विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयान, तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि अरोड़ा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 193(9) के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत पुनः विवेचना कर सभी आवश्यक साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए नई जांच रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।