नगर निगम पर करोड़ों रुपये का बकाया है। अब इसका भुगतान करने के लिए एक अरब से ज्यादा की संपत्ति बेचने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव निगम प्रबंधन ने शासन को भेजा है। नगर निगम की शीशमहल के पास साढ़े पांच हेक्टेयर जमीन है।
इस पर अवैध रूप से सरकारी विभाग के अलावा श्रमिक बस्ती आबाद है। निगम इस समय आर्थिक संकट से गुजर रहा है। नगर निगम की सालों सेवा कर चुके कर्मियों के ग्रेच्युटी, पेंशन समेत कई भुगतान लटके हुए हैं। मौजूदा कर्मियों के देयक के अलावा वेतन महीनों से नहीं मिला है।
इनका बकाया ही 20 करोड़ के आसपास है। ऐसे में निगम ने शीशमहल की श्रमिक बस्ती को कब्जेदारों को ही सर्किल रेट पर बेच कर भुगतान चुकाने की योजना बनाई है। निगम ने मौजूदा जमीन की कीमत एक अरब बारह करोड़ का आंकलन किया है। सूत्रों के अनुसार इसका पत्र मेयर ने शासन को भेजा है।
इसमें जमीन बेचने की अनुमति के अलावा कर्मियों के भुगतान के लिए बीस करोड़ रुपये की भी मांग की गई है। अगर शासन अनुमति प्रदान कर देता है, तो बिना शासन के बजट मिले भी आर्थिक संकट दूर हो जाएगा। साथ में काफी समय तक नगर निगम को आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मियों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे परेशान कर्मी निगम कार्यालय में लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को फिर बड़ी संख्या में रिटायर कर्मी पहुंचे और धरना दिया। उनका कहना है कि जल्द उनके ग्रेच्युटी, पेंशन आदि का भुगतान किया जाए।