नगर निगम का दफ्तर अराजकता का अखाड़ा बनकर रह गया है। कर्मचारी कब ड्यूटी आते और कब चले जाते हैं? कोई पूछने वाला नहीं है। मुख्य नगर अधिकारी खुद महीनों तक दफ्तर में नहीं बैठते हैं। उनकी समस्या है कि उनके पास सिटी मजिस्ट्रेट का दायित्व है। इन हालातों में कर्मचारी बेलगाम हैं। हाजिरी लगाने के लिए कर्मचारी बायोमैट्रिक कार्ड दूसरे साथियों को थमा देते हैं। दूसरे साथी से हाजिरी लगाने का यह सिलसिला महीने और हफ्ते में बदलते रहता है।
नगर निगम शहर का विकास तो दूर अपने संसाधनों से कर्मचारियों का वेतन तक नहीं निकाल पा रहा है। बोर्ड के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों में हमेशा टकराव रहता है। इसका फायदा कर्मचारी उठाते हैं। निगम में 150 कर्मचारियों और अधिकारियों का स्टाफ है। कर्मचारियों की हाजिरी लगाने के लिए थंब इंप्रेशन और बायोमैटिक कार्ड बने हैं। थंब इंप्रेशन के लिए दफ्तर पहुंचना जरूरी होता है, इसीलिए कर्मचारी बायोमैट्रिक कार्ड से हाजिरी लगाते हैं। इसमें भी घालमेल होता है। कर्मचारी अपने कार्ड दूसरे साथी को दे देते हैं। मंगलवार को डीएम के छापे में इसकी पोल भी खुली है। छापे में 38 कर्मचारी गैरहाजिर मिले। ब्यूरो