पहाड़ हो या मैदान स्वास्थ सेवाओं की स्थिति हर जगह एक जैसी ही है। स्वास्थ विभाग की लाइफ लाइन 108 अगर हादसे के दौरान तत्काल पहुंच जाए तो घायल की मृत्यु या जीवन का अंतर तय कर सकती है। लेकिन हल्द्वानी में शुक्रवार को एक ऐसा केस सामने आया, जिसमें गंभीर व्यक्ति को तत्काल 108 नहीं मिल सकी। स्थानीय लोग बेहोश व्यक्ति को निजी वाहन से अस्पताल ले गए।
शुक्रवार सुबह 11:35 बजे हीरा नगर स्थित गोल्ज्यू मंदिर के निकट एक युवक सड़क किनारे बेसुध पड़ा था। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। 11:38 बजे 108 को फोन किया तो महिला ने एंबुलेंस भेजे जाने के लिए पते की जानकारी मांगी। करीब 11:51 बजे 108 सेवा से फोन आया और बताया गया कि इस समय लोकल 108 सेवा उपलब्ध नहीं है।
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देहरादून 108 से कालाढूंगी 108 सेवा स्टाफ से बात कराई गई, लेकिन तब तक घटनास्थल पर मौजूद लोग बेसुध युवक को होश में ला चुके थे। हालांकि वह अपने बारे में कुछ भी नहीं बता पाया। बाद में लोग उसे ई-रिक्शे में बैठाकर अस्पताल ले गए। सवाल यह उठता है की यदि मौके पर कोई बड़ा हादसा या दुर्घटना हो जाती तो क्या कालाढूंगी से 108 एंबुलेंस के आने का इंतजार किया जाता। कालाढूंगी से हल्द्वानी पहुुंचने तक एंबुलेंस को कम से कम 30 मिनट का समय लगता है और इतनी देर में तो कुछ भी हो सकता है।