नैनीताल। सितंबर का दूसरा पखवाड़ा रोचक आकाशीय घटनाओं का साक्षी बनने जा रहा है। इस दौरान आंशिक सूर्यग्रहण पड़ेगा और शरद विषुव पड़ेगी जब दिन और रात बराबर अवधि के होंगे और शरद ऋतु की शुरुआत होगी। इसके अलावा गुरु और चंद्रमा बेहद करीब आएंगे। शनि पृथ्वी के बहुत निकट आकर चमकीला नजर आएगा और आकाशगंगा भी साफ नजर आएगी।
16 सितंबर को अर्धचंद्राकार चांद बृहस्पति के बहुत करीब दिखाई देगा। इस दौरान बृहस्पति को नंगी आंखों से देखा जा सकेगा और दूरबीन की मदद से इसके गैलीलियन चंद्रमाओं को भी देखा जा सकेगा। 21 सितंबर को दो खगोलीय घटनाएं होंगी। रात में चांदनी न होने के कारण आकाशगंगा, तारा समूह और चमकीले आकाशगंगा के केंद्र देखे जा सकेंगे। इसके अलावा, शनि सूर्य के विपरीत दिशा में और पृथ्वी के निकट आने से सामान्य से अधिक चमकीला दिखाई देगा। 21 सितंबर को आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। हालांकि यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात को पड़ेगा, इसलिए भारत में नजर नहीं आएगा। इस पखवाड़े में एनजीसी 55 नामक आकाशगंगा को देखने का अवसर मिलेगा जिसे काल्डवेल 72 या मोतियों की माला भी कहा जाता है क्योंकि इसका आकार मोतियों की एक पंक्ति जैसा लंबा होता है।
22 सितंबर को भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होगा सूर्य
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) के रजिस्ट्रार मोहित जोशी ने बताया कि 22 सितंबर को विषुव के दिन सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है जिसके परिणामस्वरूप दुनिया के अधिकतर हिस्सों में दिन और रात की लंबाई लगभग बराबर होती है। इस दिन से शरद ऋतु की शुरुआत हो जाती है। विशेष बात है कि इसे समान दिन और रात कहा जाता है लेकिन वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण विषुव के दिन अंधेरे की तुलना में दिन का प्रकाश थोड़ा अधिक होता है। कुछ दिन बाद जाकर दिन और रात की समान लंबाई घटित होती है जिसे इक्विलक्स कहा जाता है।