नैनीताल। एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि में अंतरिक्ष विज्ञानी ब्लैक होल का वजन जानने के नजदीक पहुंच गए हैं। अंतरिक्ष से जुड़े कल्पना से भी परे एक रहस्य से पर्दा उठाया है आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों की टीम ने। इस शोध के बाद अब ब्लैक होल के वजन सहित उससे जुड़े तमाम रहस्य ज्ञात हो सकेंगे, जिनसे ब्रह्मांड की उत्पत्ति संबंधी जानकारी भी मिल सकेगी।
वैज्ञानिकों ने करीब दस मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर सौर मंडल के सबसे पुराने माने जाने वाले ब्लेजर में एक बहुत ही विशाल फ्लेयर (चमक) देखी है, जिसका आकार और चमक बहुत ही तेजी से बढ़ रही है। यह चमक जिस कदर तेजी से बढ़ी है वह अत्यंत आश्चर्यजनक और अद्भुत है, इससे वैज्ञानिक भी हैरान हैं। प्रेक्षण के मात्र 80 दिन के भीतर चमक में हुई बढ़ोतरी ही 250% है जो कि सूर्य की चमक से चार हजार अरब (चार ट्रीलियन) गुना ज्यादा है जबकि इसकी मूल चमक पहले ही सूर्य की चमक से खरबों खरब गुना ज्यादा थी।
एरीज के वैज्ञानिक एक अंतरराष्ट्रीय शोध अभियान के तहत डॉ. आलोक चंद्र गुप्ता के नेतृत्व में डॉ. विनीत धीमान, डॉ. पंकज कुशवाहा, डॉ. हरितमा गौर सहित तुषार त्रिपाठी, सुभाष किशोर की टीम ने यह अध्ययन किया। इस दौरान बीएल लैसेट नामक इस ब्लेजर से निकली चमक का प्रेक्षण इन वैज्ञानिकों ने 27 अक्तूबर 2020 से 21 जनवरी 2021 के मध्य किया। प्रेक्षण के परिणामों के अध्ययन से ये चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।
डॉ. गुप्ता के अनुसार इस अध्ययन से ब्लैक होल का वजन जानने में सहायता मिलेगी और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। इस अध्ययन में एरीज के संपूर्णानंद टेलीस्कोप सहित देवस्थल के 1.3 मीटर टेलीस्कोप से प्रेक्षण किए गए। बताया कि यह ब्लेजर 50 उन प्रमुख ब्लेजर में शामिल है जिन्हें सामान्य टेलीस्कोप से देखा जा सकता है। इससे इस प्रकार की चमक के निकलने की प्रक्रिया संबंधी पेचीदा प्रक्रिया को समझने में भी सहायता मिलेगी।