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20 साल के आंकड़ों में दिखा बदलाव: नैनीताल में बारिश का औसत हुआ आधा, तेज बारिश की घटनाओं का खतरा बढ़ा

Thu, 24 Sep 2026 09:18 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

हिमालय में बढ़ते तापमान के साथ मानसून का मिजाज भी बदलता दिखाई दे रहा है। नैनीताल में पिछले दो दशकों के बारिश के आंकड़े इस बदलाव की तस्वीर सामने ला रहे हैं।
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नैनीताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमालय में बढ़ते तापमान के साथ मानसून का मिजाज भी बदलता दिखाई दे रहा है। नैनीताल में पिछले दो दशकों के बारिश के आंकड़े इस बदलाव की तस्वीर सामने ला रहे हैं। एक दशक पहले जहां शहर में सालाना औसत बारिश करीब 3800 मिलीमीटर के आसपास रहती थी, वहीं हाल के वर्षों में यह घटकर करीब 2100 से 2300 मिलीमीटर के बीच रह गई है। यानी बारिश की कुल मात्रा में बड़ी कमी के साथ मानसून का पारंपरिक चक्र भी प्रभावित हुआ है।

नैनीताल में 2007 से 2017 के बीच कई वर्षों में 3000 से 4500 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई। वर्ष 2010 में 4313, 2011 में 4479, 2013 में 4289, 2014 में 4570 और 2015 में 4300 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसके बाद बारिश के आंकड़ों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2019 में यह घटकर 1521, 2020 में 1572 और 2022 में 1693 मिलीमीटर रह गई। 2024 में 2133 और 2025 में 2344 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। वर्ष 2026 में अब तक 2040 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।

कम बारिश के साथ बदल रही बारिश की प्रकृति

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मौसम में बदलाव का असर सिर्फ कुल बारिश की मात्रा तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने और कम समय में अत्यधिक बारिश होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इससे प्राकृतिक जल स्रोतों में पर्याप्त पानी का संचयन नहीं हो पाता और दूसरी ओर अचानक तेज बारिश से भूस्खलन, जलभराव और मिट्टी के कटाव का खतरा बढ़ जाता है। ---

बर्फबारी और जल स्रोतों पर भी असर
लगातार बढ़ते तापमान का असर हिमालय की बर्फबारी और जल स्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। नैनीताल समेत पर्वतीय क्षेत्रों में कई पारंपरिक जल स्रोतों का स्तर घटा है। कुछ स्रोत सूख चुके हैं, जबकि बचे स्रोतों में भी पहले की तुलना में पानी कम होने की शिकायत सामने आती रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान बढ़ने से वायुमंडलीय और जल चक्र में बदलाव होना स्वाभाविक है। इससे मानसून की अवधि, बारिश की तीव्रता और उसके वितरण में परिवर्तन हो सकता है।

तापमान बढ़ने के साथ रेनफॉल घटना स्वाभाविक है। वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग के संकेत बताते हैं कि अब बारिश कम होगी, लेकिन जब होगी तो कम समय में अधिक बारिश होने की संभावना रहेगी। वैश्विक तापमान में जहां करीब 1.5 डिग्री की वृद्धि हुई है, वहीं हिमालय में तापमान वृद्धि करीब तीन डिग्री तक बताई जा रही है। सीओ2 और ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने से हाइड्रोलॉजिकल साइकल का प्रभावित होना स्वाभाविक है - डॉ. नरेंद्र सिंह, मौसम वैज्ञानिक, एरीज

 

नैनीताल में 20 वर्षों की बारिश का आंकड़ा

वर्ष       बारिश (मिमी)      वर्ष     बारिश (मिमी)

2007         3252             2017        3418

2008         2806              2018       2062

2009          2959             2019       1521

2010           4313              2020     1572

2011            4479             2021     2433

2012           3438              2022     1693

2013           4289              2023       2215

2014            4570              2024        2133

2015            4300              2025         2344

2016             3250               2026        2040 (अब तक)

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