पेयजल निगम के 229 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका है। इन कर्मचारियों को जलनिगम ने जलसंस्थान के लिए रिलीव कर दिया है। जलसंस्थान के अधिकारी पेयजल निगम के कर्मचारियों के हस्तांतरण संबंधी कोई आदेश नहीं होने का हवाला देते हुए उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दे रहे हैं।
कर्मचारी तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। जलनिगम, जलसंस्थान मजदूर यूनियन ने जलनिगम के उच्चाधिकारियों पर तुगलकी आदेश जारी करने का आरोप लगाया है। पेयजल निगम के नियमित फील्ड कर्मचारियों को पेयजल योजनाओं के रखरखाव में लगाया गया हैं।
पेयजल निगम के मुख्य अभियंता की ओर से अधिशासी अभियंताओं से पेयजल निगम द्वारा निर्मित एवं रखरखाव की जा रही योजनाओं पर लगे कर्मचारियों को बिना किसी शासनादेश के उत्तराखंड जलसंस्थान को सौंपे जाने को कहा है।
मुख्य अभियंता के आदेशों के क्रम में अधिशासी अभियंताओं ने पेयजल निगम कार्मिकों को जलसंस्थान के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया है। दूसरी ओर जलसंस्थान के अधिकारियों ने बिना शासनादेश या जलसंस्थान के उच्चाधिकारियों का आदेश न होने के कारण कर्मचारियों को कार्यभार ग्रहण नहीं कराने से मना करा दिया है।
भोटिया पड़ाव स्थित कार्यालय में मंगलवार को जलनिगम, जलसंस्थान मजदूर यूनियन की कुमाऊं मंडल की बैठक में यूनियन महामंत्री राजेश गोला ने कहा कि पेयजल निगम के अदूरदर्शी निर्णय के कारण ही पेयजल निगम कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब हुई है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों का हस्तांतरण संबंधी आदेश वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। बैठक में पूरन पांडे, विरेंद्र सिंह बिष्ट, सुरेश तिवारी, गणेश दत्त तिवारी, भोपाल सिंह मेहरा, अरविंद दुबे, ज्ञान चंद्र, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, राजेश रावत, तारीराम, जीशान अली, दिनेश पांडे, अवानंद जोशी, सूरज थापा, विशन सिंह जनोटी समेत मंडल भर के कर्मचारी थे।