जिलाधिकारी दीपक रावत ने शनिवार अपरान्ह में तहसील में छापा मारा। उन्होंने स्टांप वेंडरों के स्टांप की खरीद एवं बिक्री के रिकार्ड की जांच की। रिकार्ड में अनियमितताएं मिलने पर चार वेंडरों के लाइसेंस निरस्त कर दिए।
तहसील में स्टांप वेंडर ग्राहकों से मनमानी कीमत वसूलते हैं। 10 रुपये और 20 रुपये का स्टांप दोगुने कीमत पर बेचा जाता है। 50 और 100 रुपये के स्टांप में भी अतिरिक्त पैसे लिए जाते हैं। ग्राहकों के स्टांप के निर्धारित कीमत से अधिक पैसे देने से इनकार करने पर उन्हें स्टांप नहीं दिया जाता है। ग्राहकों की शिकायत पर डीएम ने मार्च 2015 में तहसील के वार्षिक निरीक्षण में सभी स्टांप विक्रेताओं को अनिवार्य रूप से अपने स्टाल के आगे कुल स्टांप और उनके मूल्य की जानकारी दर्ज करने के आदेश दिए थे।
शनिवार को डीएम अचानक तहसील पहुंचे। डीएम के देख कर्मचारियों के हाथ पांव फूल गए। हालांकि, डीएम ने तहसील कार्यालय का निरीक्षण नहीं किया। वह तहसील परिसर में ही स्टांप वेंडरों के स्टालों का निरीक्षण कर रिकार्ड चेक करने पहुंच गए। इस दौरान प्रदीप जोशी, नसरुद्दीन, विनोद सिंह नेगी और गोकुल कुमार के स्टाल के आगे स्टांप की संख्या और दर का अंकन नहीं मिला। डीएम ने नाराजगी जताते हुए चारों स्टांप वेंडरों के स्टांप लाइसेंस निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट आरडी पालीवाल को निर्देश दिए कि स्टांप विक्रेताओं के स्टालों का नियमित निरीक्षण करें। स्टांप संख्या और दर अंकन नहीं करने वालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं।