सुशीला तिवारी अस्पताल के बाद अब बेस अस्पताल के हालात भी बिगड़ने लगे हैं। बेस अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए आ रहे गरीब मरीजों से बाहर से दवा मंगाई जा रही है। मरीजों को हीमोग्लोबिन के इंजेक्शन से लेकर ब्लड प्रेशर कम करने की दवाएं खरीदवाई जा रही हैं।
बेस अस्पताल में नेफ्रो प्लस को डायलिसिस करने की जिम्मेदारी मिली है। डायलिसिस सेंटर की शुरूआत के साथ ही दो मरीज डायलिसिस न होने के कारण मृत्य हो गई थी। आजाद नगर निवासी मोहम्मद इरशाद गुर्दा रोग से पीड़ित हैं। इरशाद की डायलिसिस बेस अस्पताल के नेफ्रो प्लस में चल रही है। इरशाद से हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए लगने वाला इंजेक्शन एरिथ्रोपोइटिन बाजार से मंगवाया जा रहा है। एक इंजेक्शन की कीमत पांच सौ रुपये है। नेफ्रो प्लस प्रबंधन की मनमानी से मरीज खासे परेशान हैं।
इरशाद ने बताया कि डायलिसिस के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने पर डायलिसिस सेंटर से ही ब्लड प्रेशर कम करने के लिए दवा दी जाती थी मगर अब ऐसा नहीं हो रहा है। ब्लड प्रेशर बढ़ने पर मरीज के परिजनों से बाहर से दवा मंगाई जा रही है। सिर में दर्द होने पर भी दवा बाहर से लानी पड़ रही है।
नेफ्रो प्लस के एमओयू में लिखा था कि दवा की धनराशि नहीं मिलेगी। इसलिए दवा मरीजों से बाहर से मंगवाई जा रही थी। शनिवार को स्वास्थ्य महानिदेशक से बात कर दवा अस्पताल से ही देने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। दवा और इंजेक्शन का भुगतान सरकार ही करेगी। हीमोग्लोबिन का इंजेक्शन लगाने पर नेफ्रो प्लस कंपनी को बिल देना होगा और भुगतान कर दिया जाएगा।
-डॉ. एमएस बोरा, सीएमएस, बेस अस्पताल