तराई पूर्वी वन प्रभाग, सुरई जोन को और बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित करने की तैयारी में है। सीएम धामी का ड्रीम प्रोजेक्ट सुरई, अब एक पुल के जरिए क्रोकोडाइल ट्रेल से जुड़ जाएगा। फाटो-कार्बेट की तर्ज पर यहां जिप्सी भी दो से ज्यादा बढेगी। दस के करीब रिसोर्ट भी तैयार होंगे। पर्यटक की आवाजाही से सालाना 1.5 से 2 करोड़ की आय का अनुमान है। पूरा प्रोजेक्ट तैयार है। सात से आठ दिन में इसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाना है। पहले चरण में 50 लाख की डिमांड की जानी है।
सुरई जोन तराई पूर्वी वन प्रभाग का बड़ा हिस्सा है। 180 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्रफल है। बाघ सहित स्तनधारियों की लगभग 125 प्रजाति है। पक्षी की 150 से ज्यादा हैं और सरीसृपों की भी 20 प्रजाति हैं। 18 दिसंबर 21 को इसका उद्धाटन सीएम ने किया था। सुरम्य क्षेत्र, घास का मैदान, प्राचीन शारदा नहर और खूबसूरत तालाबों को अपने भीतर समेटे सुरई जोन की बेहतरी को फिर कदम बढ़े हैं। वर्तमान में यहां दो जिप्सी हैं जबकि रूकने को दो कमरे। नतीजतन पर्यटकों की आवाजाही भी कम है। उधर तमाम पर्यटक ऐसे भी हैं जो कार्बेट, फाटो से अलग नई जगह चुनना चाहते हैं। उनके लिए सुरई बेहतर विकल्प बन सकता है। नए प्रस्ताव में यहां जिप्सी की संख्या दो से बढ़ाकर 10 जबकि दस नए रिसोर्ट भी तैयार होने हैं।
पुल के जरिए क्रोकोडाइल ट्रेल से सुरई जल्द ही जुड़़ने वाला है। यह यर्यटक की आवाजाही बढ़ाएगा। क्योंकि सुरई से ही उन्हें क्राकोडाइल ट्रेल का भी दीदार होगा। प्रवेश के लिए खटीमा में एक प्रवेश द्वार है। प्रोजेक्ट में दूसरी इंट्री कांकड़ा से भी होगी। चूंकि टाइगर की डेंसिटी भी सबसे ज्यादा है। ऐसे में बाघ को आसानी से यहां देखा भी जा सकेगा।
यह है इसकी सीमा
- पूर्व में शारदा सागर डैम
- पश्चिम में खटीमा नगर
- उत्तर में मेलाघाट रोड
- दक्षिण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र
ये जानवर दिखेंगे (पर्यटक दुर्लभ वन्य जीवों का आनंद उठा सकते हैं)
- रॉयल बंगाल टाइगर
- भालू
- चीतल
- सांभर
- काकड़
- कोरल स्नेक
- पांडा
- मगरमच्छ की प्रजाति मार्श
सीएम यंग ईको प्रिन्योर स्कीम के तहत विकास
सुरई इकोटूरिज्म जोन के जरिए रोजगार भी बढ़ेगा। सीएम यंग ईको प्रिन्योर स्कीम के अंतर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर, ईकोटूरिज़्म, वन्यजीव टूरिज्म पर आधारित कौशल को उद्यम में बदला जाना है। समृद्ध जैव विविधता है ऐसे में पर्यटकों का आकर्षण ज्यादा होगा।
प्रस्ताव तैयार है। अगले सप्ताह इसे शासन को भेजेंगे। शुरुआत में 50 लाख की डिमांड है। प्रोजेक्ट पूरा होने पर यहां से 1.5 से 2 करोड़ तक की आय हो सकती है। जिप्सी बढेगी और आवास भी निर्मित होंगे। जल्द ही सुरई, क्रोकोडाइल ट्रेल से सीधे जुड़ेगा। पीलीभीत के पर्यटक भी यहां आएंगे। -हिमांशु बागरी प्रभागीय वनाधिकारी तराई पूर्वी