सुनवाई के दौरान याची ने पक्ष रखा कि वहां सक्षम अधिकारियों से अनुमति प्राप्त किए बगैर विकास गतिविधियों को करने के लिए जेसीबी मशीन का भी इस्तेमाल किया गया। स्टेट ने कभी भी पर्यावरण विभाग की अनुमति नहीं ली गई। कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया यह प्रतीत होता है कि स्टेट ने घने वन क्षेत्र में विकास गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिसमें 40% से अधिक घने पेड़ हैं, हम पूरे जिलिंग स्टेट की नए सिरे से जांच करवाना चाहते हैं।
11 फरवरी 2020 को उच्चतम न्यायालय ने रेवेन्यू फॉरेस्ट विभाग से इसका सर्वे व जांच करने के आदेश दिए थे उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।