जमीरा गांव के विद्यार्थियों को रोज पढ़ाई से पहले चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर इंटर कॉलेज पहुंचना पड़ता है। उबड़ खाबड़ रास्ता और कटीली झाड़ियां छात्र-छात्राओं को जख्म दे रही हैं। स्कूल आने और जाने में उन्हें करीब 14 किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
नैनीताल जिला मुख्यालय से 13 किमी दूर जमीरा गांव के विद्यार्थियों को रोज पढ़ाई से पहले चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर इंटर कॉलेज पहुंचना पड़ता है। उबड़खाबड़ रास्ता और कटीली झाड़ियां छात्र-छात्राओं को जख्म दे रही हैं। स्कूल आने और जाने में उन्हें करीब 14 किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
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देवीधूरा का तोक जमीरा नैनीताल से तेरह और राष्ट्रीय राजमार्ग से चार किमी दूर है। यह गांव सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा झेल रहा है। बरसात के कारण इन दिनों रास्ता झाड़ियों से बंद है। मार्ग जर्जर होने से स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए रोजाना पहले चार किमी खड़ी चढ़ाई कर बल्दियाखान आना पड़ता है। इसके बाद यहां से तीन किमी का सफर तय कर स्कूल पहुंचते हैं जिससे कई बार बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
सब्जी मंडी ले जाने और बीमार को अस्पताल ले जाने में होती है दिक्कत : दो किमी का जर्जर और झाड़ियों से घिरा रास्ता ग्रामीणों को भी दर्द दे रहा है। खराब रास्ते के कारण ग्रामीण भी चार किमी की चढ़ाई के बाद सब्जी बेचने के लिए मंडी पहुंच रहे हैं। रास्ता ठीक नहीं होने के कारण बीमार लोगों को अस्पताल तक ले जाने में भी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
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55 साल से इस गांव में सड़क नहीं बन पाई है। रात तीन बजे चार किलोमीटर पैदल चलकर सब्जी मंडी पहुंचा रहे हैं। टूटा रास्ता लोगों के लिए परेशानी बन गया है। पूरन सिंह बिष्ट
गांव के रास्ते चलने लायक नहीं हैं। उसके बाद भी ग्रामीणों को सब्जी लेकर रोजाना बाजार तक जाना पड़ता है। झाड़ियां उगने से परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है। - भूपाल सिंह मेहता
हम लोग जैसे-तैसे सब्जी लेकर बाजार जा रहे हैं, लेकिन रास्ता टूटने के कारण स्कूली बच्चों को घूमकर बल्दियाखान होते हुए स्कूल जाने के लिए रोजाना 14 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। - बालम सिंह भाकुनी