कुमाऊं के साथ ही अंतरराष्ट्रीय भूदृश्य पर शोध के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय और पेरिस विवि के बीच करार हुआ है। फ्रांस के पेरिस विवि के भूगोल विषय के दो शोधार्थी कुमाऊं के पर्यटन भूदृश्य पर शोध कार्य करने यहां पहुंचे हैं। शोध कार्य तीन साल तक चलेगा।
कुमाऊं विवि भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. रघुवीर चंद को परियोजना का इंडिया कोआर्डिनेटर बनाया गया है। डा. चंद ने बताया पेरिस विवि के मोहित कपूर और मॉवा लेतांग कुमाऊं के पर्यटन भूदृश्य पर शोध करने यहां पहुंचे हैं। कुविवि के कुलपति और पेरिस विवि के अध्यक्ष के बीच 21 जनवरी 2014 को इस संबंध में करार हुआ था। दोनों देशों के भूगोल विभाग के प्रोफेसर और शोध छात्रों की टीम काम कर रही है।
यह शोध परियोजना भारत के साथ ही पांच अन्य देशों नेपाल, चीन, लाओस, वियतनाम में भी चल रही है। प्रो. चंद के मुताबिक फ्रांस सरकार की सेंटर फार नेशनल रिसर्च संस्था इस शोध कार्य के लिए फंडिंग कर रही है। इस परियोजना को एक्वापा (एक्यूएपीए) नाम दिया गया है। एशिया भूदृश्य एवं पर्यटन भूदृश्य के विश्लेषण के लिए सीमांत और पिछड़े क्षेत्रों की जनसंख्या को भी आधार बनाया जाएगा। 20 अप्रैल से 5 मई तक पेरिस विवि के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष फ्रेडरिक लेंडी और एसोसिएट प्रोफेसर वियट्रिस मोपेट के साथ प्रो. रघुवीर चंद भी जोहार घाटी का विस्तृत क्षेत्रीय अध्ययन करेंगे।