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आवारा लड़कों की जिंदगी में झांकती है ‘मोड़’

Mon, 02 May 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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‌‌‌फिल्म आर्ट एंड गिल्ड - फोटो : अमर उजाला
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 फिल्म एंड आर्ट्स गिल्ड ऑफ उत्तराखंड की ओर से आयोजित फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन पुष्पा रावत की डाक्यूमेंट्री ‘मोड़’, रोहित धूलिया की ‘बदलाव के जख्म’ और यूसुफ सईद की ‘ख्याल दर्पण ’ दिखाई गई। इस दौरान दर्शकों और निर्देशकों के बीच सवाल जवाब भी हुए। 

पुष्पा रावत की डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘मोड़’ उन लड़कों की कहानी है, जिन्हें समाज में आवारा कहा जाता है। फिल्म की कहानी पानी की टंकी के आसपास जुटने वाले युवाआें पर केंद्रित है। इन युवाओं में नशा और जुआ की लत होती है। पुष्पा डाक्यूमेंट्री के माध्यम से युवाओं का नशे के दलदल में भटकने का कारण तलाशती है और इस समस्या पर उनसे बातचीत करती है। ये युवा भी मानते हैं कि उनकी राह सही नहीं है पर नशा उनको अपनी जकड़ से छोड़ने को तैयार नहीं है। या कहें कि नशे ने उनके जीवन में गहरी पैठ बना ली है।
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वे नशा छोड़ना चाहते हैं और नौकरी भी करना चाहते हैं। मगर इन युवाओं को नशा छोड़ने के लिए समाज और परिवार से उचित प्रोत्साहन नहीं मिल पाता है। इसके चलते उनका दोबारा से सामान्य जिंदगी में लौटना आसान नहीं लगता है। पुष्पा खुद फिल्म में इन युवाओं का इंटरव्यू करने वाली अदृश्य पात्र है। पुष्पा ने हिम्मत जुटाकर नशा करने वाले युवाओं के बीच में जाकर उनकी समस्या को उठाया। 

 रोहित धूलिया की फिल्म ‘बदलाव के जख्म’ में विकास और विस्थापन की समस्या को उठाया गया है। फिल्म की शुरुआत श्रीनगर, गढ़वाल से होती है, जहां एक बड़ा बांध बनाया जा रहा है। बांध की वजह से ग्रामीणों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ता है। इसके अलावा बड़े बांध पर्यावरण के लिए भी सही नहीं समझे जाते हैं। यह फिल्म राजगोपालाचारी द्वारा चलाए जा रहे जन सत्याग्रह आंदोलन की भी बात करती है। यह आंदोलन समाज के वंचित वर्गों, आदिवासियों और भूमिहीनों को संसाधन दिलाने की मांग पर चल रहा है।  
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 यूसुफ सईद की फिल्म ‘ख्याल दर्पण ’ भारत विभाजन के कारण दक्षिण एशिया की संगीत परंपरा पर पड़े प्रभावों की पड़ताल करती है। इसके लिए फिल्मकार यूसुफ सईद ने पाकिस्तान में छह माह बिताए। लाहौर, कराची और इस्लामाबाद की यात्राओं के दौरान उन्होंने संगीतकारों, विद्वानों से मुलाकात की। संगीत की सभाओं में शामिल हुए और संगीत पद्धतियों को करीब से देखा। उनकी इस खोज का परिणाम, यह संगीतपूर्ण फिल्म है।  वरिष्ठ पत्रकार इरफान ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में यूओयू के  प्रो. गोविंद सिंह, डा. मृगेश पांडे, फिल्म एंड आर्ट्स गिल्ड के अध्यक्ष समित टिक्कू, उपाध्यक्ष विशाल विनायक, सचिव अशोक पांडे, कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार डा. पंकज श्रीवास्तव, दिलीप मंडल, मनीषा पांडेय आदि मौजूद थे। 
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