सुशीला तिवारी अस्पताल के डाक्टर भले ही सीमित संसाधनों में मरीज को बेहतर इलाज दे रहे हों, मगर व्यवस्था की अव्यवस्था कभी भी मरीजों पर भारी पड़ सकती है। एसटीएच के ब्लड बैंक का एजीटेटर भगवान भरोसे चल रहा है।
हालांकि चार लाख रुपये से नई एजीटेटर मशीन खरीदने के लिए टेंडर हो चुका है। जबकि बेस अस्पताल में न तो पैथोलॉजिस्ट है न एजीटेटर मशीन और न ब्लड सेपरेटर मशीन।
एसटीएच के ब्लड बैंक में लगी एजीटेटर मशीन जून में खराब हो गई थी। मशीन को रिपेयर कराकर काम चला लिया गया। एजीटेटर मशीन पर ब्लड से प्लेटलेट्स निकालकर रखी जाती हैं।
मशीन प्लेटलेट्स को हिलाती रहती है, जिससे यह जमने न पाए। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सामान्य दिन में चार से पांच यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। डेंगू के प्रकोप के कारण प्रतिदिन 15 से 20 यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ रही है।
नई एजीटेटर मशीन खरीदने के लिए टेंडर हो चुका है और चार लाख रुपये से मशीन खरीदी जानी है। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. सीएमएस रावत ने कहा कि एजीटेटर मशीन प्लेटलेट्स की पूर्ति करने में सक्षम है। जल्द ही नई मशीन आ जाएगी।
दूसरी ओर बेस अस्पताल में ब्लड बैंक तो हैं, मगर ब्लड सेपरेटर मशीन तक नहीं है। खास बात यह है कि ब्लड सेपरेट करने के लिए पैथोलॉजिस्ट तक सरकार ने नहीं दे रखा है।
बेस अस्पताल के सीएमएस डा. एससी पंत ने बताया कि जिन मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है तो एसटीएच से मंगाते हैं या मरीज को एसटीएच रेफर कर देते हैं।