गर्मियां शुरू होने के साथ जहां अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं बीडी पांडे अस्पताल डाक्टरों की कमी से सांस फूल गई है। आर्थोपेडिक सर्जन न होने से संबंधित मरीज परेशान हैं तो ईएमओ न होने से भी स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत असर पड़ रहा है।
औसतन 400 मरीजों की ओपीडी गर्मी के सीजन में बढ़कर 700 से 800 पहुंच गई है, लेकिन डाक्टर नहीं होने, सरकारी ड्यूटी और वीआईपी कार्यक्रमों की व्यस्तता से आम मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक हाल ही में ज्वाइंट डायरेक्टर पद पर पदोन्नत हुए आर्थोपेडिक सर्जन डा.संजीव प्रकाश एक दिन की ज्वाइनिंग के बाद लगभग छह माह से नदारद हैं। एक और जेडीएमओ डा. रमेश संविदा के बाद नियमित नियुक्ति होने पर भवाली चले गए हैं। ईएमओ डा. पंकज नेगी रेडियोलॉजी में पीजी कोर्स के लिए बाहर गए हैं।
डा. एमएस दुग्ताल की ड्यूटी केदारनाथ के लिए लगी है तो कुछ चिकित्सक सीएल आदि पर हैं। ऐसे में कुछ मरीज अन्यत्र जाने को विवश हैं तो अन्य को परीक्षण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इधर, वरिष्ठ फिजीशियन डा. राजेश साह ने बताया कि ईएमओ अस्पताल की अहम जरूरत है। ईएमओ की कमी से उन्हें उनके स्थान पर अन्य डाक्टर की ड्यूटी लगानी पड़ती है। इसमें संविदा या 55 वर्ष से ऊपर के डाक्टर की ड्यूटी भी नहीं लगाई जा सकती। रात में ड्यूटी वाले डाक्टर दूसरे दिन अवकाश पर रहते हैं। ऐसे में व्यवस्था संचालन में दिक्कतें होना स्वाभाविक है।