‘हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पडे़ंगे रास्ता हो जाएगा।’
मकबूल शायर डा. बशीर बद्र का यह शेर सियासत में मुस्लिम वोटरों की लहर बयां करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वह इसलिए क्योंकि मुस्लिम वोट एकतरफा पड़ते रहे हैं। विधानसभा चुनाव में बुधवार को तस्वीर भी कुछ ऐसी ही नजर आई, लेकिन कहीं-कहीं इसमें विभाजन होता दिखा।
जिले की छह विधानसभाओं में हल्द्वानी सीट पर सर्वाधिक मुस्लिम (42000) मतदाता हैं। सपा और बसपा ने यहां मुस्लिम प्रत्याशी ही उतारे। कई जगह तो मुस्लिमों में बिरादरियों के झंडे पहले ही उठ गए थे, तभी से यह लग रहा था कि विभाजन होगा, लेकिन उम्मीद के मुताबिक ऐसा कम ही दिखा।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बूथों पर संजीदगी और मजबूत पकड़ के चलते वोटरों में भटकाव की स्थिति नहीं रही। कुछ बूथों पर जरूर सपा ने दमदार उपस्थिति दर्ज की, जबकि अन्य पार्टियों और निर्दलीयों पर वोटरों ने अधिक भरोसा नहीं दिखाया।
रामनगर में भाजपा-कांग्रेस में ही मुकाबला रहा, ऐसे में मुस्लिम मतदाताओं का रूझान एकतरफा रहा। कालाढूंगी सीट पर करीब 3000 मुस्लिम मतदाता हैं। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में यहां करीब 80 फीसदी तक पोलिंग हुई।
यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने की वजह से मुस्लिम मतों को विभाजन देखा गया। नैनीताल, लालकुआं और भीमताल सीट पर बागी प्रत्याशियों की कुछ सेंध के साथ लहर एकतरफा ही दिखाई दी।
चेहरा हिजाब में, अंगुलियां ईवीएम पर
सियासतदां को अपने वजूद का अहसास कराने के लिए मुस्लिम महिलाओं ने बड़ी संख्या में बुधवार को बूथों पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बुर्कानशीं महिलाएं सुबह आठ बजे ही मतदान केंद्रों पर कतार में खड़ी देखी गईं।
दिन भर इनका उत्साह बरकरार था। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, ललित आर्य महिला इंटर कॉलेज, जूनियर हाई स्कूल लाइन नंबर 17, गांधी नगर प्राथमिक पाठशाला, राइंका बनभूलपुरा और निशात मेमोरियल स्कूल समेत आसपास के स्कूलों के मतदान केंद्रों पर बुर्कानशीं वोटरों ने पूरे जोश से लोकतंत्र के उत्सव में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
आयशा और नरगिस पहली बार वोट करने पहुंचीं। बोलीं, वोट देकर ऐसा महसूस हो रहा है कि हमने बहुत बड़ा फर्ज अदा कर दिया। खुशनुमा ने कहा कि महिलाएं वोट करेंगी तभी तो अपनी अहमियत का एहसास करा पाएंगी।
महिला वोटरों को अपने आस-पड़ोस में रहने वाली महिलाओं को भी वोटिंग के लिए प्रेरित करते देखा गया। किसी ने फोन से कॉल कर बुलाया तो किसी ने दरवाजे पर दस्तक देकर बूथ तक पहुंचने की अपील की।
निर्वाचन आयोग ने भी पर्दानशीं महिलाओं की सुविधा के लिए हर बूथ पर महिला कर्मियों की तैनाती की थीं। कहीं किसी महिला के साथ कोई परेशानी सामने नहीं आई।