हल्द्वानी। कोरोना महामारी और उत्तराखंड विषय पर ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क और विभिन्न जन संगठनों की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय संवाद में खाद्य सुरक्षा के अधिकार, शिक्षा, पर्यावरण, विकास और इनके सामाजिक प्रभाव पर चर्चा हुई। सभी ने उत्तराखंड में बदलाव के लिए सामाजिक ताकतों से एकजुट होने का आह्वान किया।
जल, जंगल, जमीन और उत्तराखंडी अस्मिता पर पीसी तिवारी ने कहा कि पहाड़ की जमीन, प्राकृतिक संसाधन लगातार हमसे छीने जा रहे हैं जिसके खिलाफसंघर्ष करना होगा। अमन संस्था की नीलिमा पांडे ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सिर्फ गेहूं, चावल बांट देना पर्याप्त नहीं है बल्कि पोषक आहार वितरित किया जाना चाहिए। महिला किसान संगठन की हीरा जंगपांगी ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आने से पहले सरकार यह सुनिश्चित करे कि आदिवासियों और वनवासियों को राशन संबंधी परेशानी न उठानी पड़े। जेपी बड़ौनी और डॉ. दीपक ने कहा कि जनसंख्या बढ़ रही है इसलिए पारंपरिक अनाजों की ओर लौटना होगा।
शिक्षा पर हुई परिचर्चा में प्रो. डॉ. रेखा जोशी ने कहा कि शिक्षा क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चाएं की जानी चाहिए लेकिन इसमें बजट का सिर्फ 0.006 प्रतिशत ही जाता है। भारती पांडे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, एंड्रॉयड फोन न होने के कारण कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई में परेशानी हुई।
कार्यक्रम में प्रदीप तिवारी, मनोज, हुकुम सिंह, पलाश विश्वास, रूपेश, हरीश रावत, भुवन चंद्र जोशी, करन राणा,सरोज सिंह, प्रदीप तिवारी, सरिता मेहरा, आनंदी वर्मा, दिनेश चंद्र पांडे आदि मौजूद रहे।