हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए एक बार फिर तबादलों की तैयारी शुरू हो गई है। 25 दिन पहले 16 फैकल्टी सदस्यों के तबादले किए जा चुके हैं। अब पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न विभागों में खाली पद भरने के लिए स्थापित मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरों के स्थानांतरण की कवायद तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, नए मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई और अस्पताल सेवाओं को सुचारु बनाने के लिए विभिन्न विभागों से फैकल्टी भेजी जाएगी। ऐसे में हल्द्वानी समेत अन्य पुराने मेडिकल कॉलेजों में भी कुछ विभागों में फैकल्टी की कमी हो सकती है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय जल्द नई तबादला सूची जारी कर सकता है। निदेशक चिकित्सा शिक्षा अजय आर्या ने बताया कि पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज को सुचारु रूप से संचालित करना प्राथमिकता है। हाल ही में तबादले किए गए हैं लेकिन अभी और जरूरत है। जल्द ही विभिन्न मेडिकल काॅलेज के विभिन्न विभागों से डॉक्टरों के तबादले किए जा सकते हैं।
एक विभाग में कितनी होती है फैकल्टी
एमबीबीएस के 100 सीट वाले मेडिकल कॉलेज में अधिकतर क्लीनिकल विभागों में सामान्यत: एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, दो से तीन असिस्टेंट प्रोफेसर तथा तीन से चार सीनियर रेजिडेंट तैनात रहते हैं। वहीं प्री और पैरा क्लीनिकल विभागों में भी प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ ट्यूटर या डिमॉन्स्ट्रेटर की व्यवस्था होती है। किसी भी पद के खाली होने का असर पढ़ाई के साथ अस्पताल की सेवाओं पर भी पड़ता है।