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बच्चेदानी से निकाला छह किलो का ट्यूमर

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नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में भर्ती गाउली देवी जिसका ट्यूमर निकाला गया। - फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। बीडी पांडे अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने बीते तीन दिन से अस्पताल में भर्ती और पेट दर्द से पीड़ित अल्मोड़ा निवासी एक महिला का ऑपरेशन कर उसकी बच्चेदानी से छह किलो का ट्यूमर (फाइब्रॉइड्स यूट्रस ट्यूमर) निकालने में सफलता प्राप्त की है। ट्यूमर निकलने के बाद महिला की हालत में सुधार है।
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अस्पताल के चिकित्सक डॉ. केएस धामी ने बताया कि फर्टिया गरुड़बाज अल्मोड़ा निवासी गाउली देवी (42) पत्नी रतन सिंह को डेढ़ साल से पेट में दर्द की शिकायत थी। वह सात दिसंबर को अस्पताल में भर्ती हुई। जांच के दौरान पता चला कि महिला की बच्चेदानी में फाइब्रॉइड्स यूट्रस गांठ बन गई है। मंगलवार को डॉ.आरएस कुंवर, डॉ.एसके धामी, डॉ.एलएस मेहता, डॉ. वीके मिश्रा की टीम ने महिला का डेढ़ घंटे का ऑपरेशन कर ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।
डॉ.धामी ने बताया कि बच्चेदानी के अंदर या आसपास बनने वाली मांसपेशियों के ट्यूमर को फाइब्रॉइड्स कहते हैं। फाइब्रॉइड्स गर्भाश्य की ऐसी कैंसर रहित गांठें हैं जो अक्सर प्रसव के दौरान दिखाई देती हैं। क्योंकि इस दौरान प्रमुख हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन सामान्य से अधिक मात्रा में रिलीज होते हैं। ऐसी स्थिति में महिला को मासिक धर्म के दौरान पेट में मरोड़ उठने के साथ तेज दर्द होता है। साथ ही अत्यधिक रक्तस्राव, लंबे समय तक मासिक धर्म चलना जैसी दिक्कतें होती हैं। कुछ मामलों में लक्षण नजर नहीं आते जो स्थिति को गंभीर बना देते हैं।
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डॉ.धामी के मुताबिक ट्यूमर का आकार बड़ा होने के कारण बच्चेदानी नीचे आ जाती है, जिस कारण बार बार लघुशंका लगती है और लघुशंका करते वक्त दर्द भी होता है। साथ ही आंतों में दबाव पड़ता है। डॉ. धामी कहते हैं कि 40 वर्ष की उम्र के बाद बच्चेदानी में गांठ बनने के ज्यादा आसार रहते हैं, लिहाजा 40 वर्ष पार कर चुकी महिलाओं को एक बार बच्चेदानी की जांच जरूर करानी चाहिए।
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