हल्द्वानी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान इन दिनों सत्यापन केंद्रों पर सिर्फ दस्तावेज की जांच नहीं हो रही बल्कि लोगों को अपने पुराने रिश्तों और भूली-बिसरी यादों से भी दोबारा जुड़ने का मौका मिल रहा है। प्रपत्रों के सत्यापन और सुधार के दौरान रोजाना ऐसे रोचक मामले सामने आ रहे हैं जो चर्चा का विषय बन रहे हैं।
एसआईआर नोटिस मिलने के बाद मतदाता प्रपत्र में पिता का नाम दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। इसी प्रक्रिया के दौरान कई लोगों को अपने परिवार की पुरानी जानकारियां जुटानी पड़ रही हैं। मंगलवार को हिम्मतपुर मल्ला ऊंचापुल स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया। एक व्यक्ति अपने परिवार के पांच सदस्यों के प्रपत्रों का सत्यापन कराने पहुंचे थे। उनकी माता के प्रपत्र में उनके पिता यानी व्यक्ति के नाना का नाम दर्ज किया जाना था। अधिकारी ने जब नाना का नाम पूछा तो वह कुछ देर के लिए सोच में पड़ गए। काफी प्रयास के बाद उन्होंने ननिहाल फोन कर परिजनों से जानकारी ली, जिसके बाद नाना का नाम मिल सका और प्रपत्र पूरा हुआ। इस घटना से वहां चर्चा रही कि एसआईआर के बहाने कई लोगों को अपने नाना-नानी और परिवार की पुरानी यादें भी याद आने लगी हैं।
इन पुराने दस्तावेज की चर्चा
खतौनी और खसरा अभिलेख
पेंशन से जुड़े दस्तावेज (पीपीओ, पेंशन आदेश)
परिवार रजिस्टर की नकल
पुराने राजस्व अभिलेख
स्कूल के पुराने प्रमाणपत्र
वर्षों पुराने स्थायी निवास प्रमाणपत्र
सालों बाद कागजात से उड़ाई धूल
बड़ी संख्या में बुजुर्ग ऐसे भी हैं जो सत्यापन के लिए वर्षों पुराने दस्तावेज लेकर पहुंच रहे हैं। कई वरिष्ठ नागरिकों के हाईस्कूल प्रमाणपत्र लंबे समय से अलमारी या पुराने संदूकों में बंद थे। नौकरी पूरी होने और बच्चों की पढ़ाई खत्म होने के बाद इन दस्तावेज की कभी जरूरत नहीं पड़ी लेकिन अब मतदाता सत्यापन में यही प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। कई बुजुर्गों ने बताया कि उन्हें दशकों बाद अपने पुराने प्रमाणपत्र ढूंढने पड़े। संदूक और अलमारी में रखे दस्तावेजों से धूल हटाकर उन्हें सत्यापन केंद्र तक लाया गया।
केस स्टडी
केस स्टडी-1: अल्मोड़ा से हल्द्वानी आकर बसे एक परिवार के छह सदस्यों में से तीन लोगों का सत्यापन आसानी से हो गया लेकिन तीन सदस्यों के प्रपत्रों के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए। इसके बाद परिवार के एक सदस्य ने वर्षों पुराना स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जिसके आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो सकी।
केस स्टडी-2: हिम्मतपुर मल्ला ऊंचापुल आंगनबाड़ी केंद्र में एक बुजुर्ग महिला अपने परिवार के सदस्यों का सत्यापन कराने पहुंची थीं। सत्यापन के दौरान उनके पति के दस्तावेज में हाईस्कूल प्रमाणपत्र लगाने की आवश्यकता सामने आई। पुराने प्रमाणपत्र को खोजने के लिए उन्होंने अधिकारियों से दो दिन का समय मांगा।