हाईकोर्ट ने प्रदेश के 13 जिलों में से 11 में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्षों और सदस्यों की कमी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट ने एक समाचारपत्र में छपी खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की। समाचारपत्र में कहा गया कि प्रदेश में राज्य उपभोक्ता आयोग के साथ ही सभी जिला मुख्यालयों में जिला उपभोक्ता फोरम का गठन किया गया है लेकिन 13 में से 11 जिलों में अध्यक्ष और सदस्य नहीं हैं।
इससे उपभोक्ता मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, चमोली, पिथौरागढ़, टिहरी पौड़ी, रूद्रप्रयाग, बागेश्वर,चंपावत में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। हरिद्वार व देहरादून के कंज्यूमर फोरम निष्क्रिय साबित हुए हैं।
हरिद्वार में तो उपभोक्ता फोरम के वादों की सुनवाई एक साल से नहीं हुई है और देहरादून में वादों की अंतिम सुनवाई सितंबर 2022 को हुई। हरिद्वार और देहरादून में उपभोक्ता फोरम के 1470 वाद लंबित हैं। समय पर वादों की सुनवाई नहीं होने से उपभोक्ताओं को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। यही हाल अन्य जिलों का भी है।